गुना। मध्यप्रदेश के गुना जिले अंतर्गत बमोरी विकासखंड के ग्राम बछावदा में 'आत्मा योजना' के तहत एक दिवसीय खरीफ कृषक संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों और विभागीय अधिकारियों ने क्षेत्र के किसानों को खरीफ फसलों की उन्नत तकनीकों, कीट एवं रोग नियंत्रण, मृदा स्वास्थ्य तथा शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।

कम लागत और वैज्ञानिक तकनीकों पर जोर

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सहायक संचालक कृषि, श्री अरुण पाटीदार ने किसानों को पारंपरिक खेती के बजाय वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बदलते मौसम और बढ़ती लागत के इस दौर में किसानों को प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और कम लागत में अधिक उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

वैज्ञानिकों ने साझा कीं उन्नत तकनीकें

आरोन से आए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को वैज्ञानिक खेती के व्यावहारिक तरीके समझाए:

  • बीजोपचार व किस्म चयन: बोवनी से पूर्व उन्नत बीजों के चयन और अनिवार्य बीजोपचार की विधि बताई गई।
  • समेकित कीट प्रबंधन (IPM): फसलों में अनावश्यक कीटनाशकों के प्रयोग से बचने और केवल विशेषज्ञों की सलाह पर ही दवाओं का इस्तेमाल करने की हिदायत दी गई।
  • मृदा स्वास्थ्य व जैव विविधता: मिट्टी परीक्षण के आधार पर संतुलित उर्वरक, जैविक खाद और जल संरक्षण तकनीकों को अपनाने पर बल दिया गया। फसल अवशेषों (पराली) को जलाने के बजाय उनके उचित प्रबंधन की सलाह दी गई।

विभागीय योजनाओं से कराया अवगत

संगोष्ठी में बमोरी के BTM श्री मुरारी लाल त्यागी, आरोन के BTM श्री आर.एस. लोधा, गुना के BTM डॉ. मनमोहन सिंह भूरिया और राधौगढ़ के BTM श्री सुनील ने अपने-अपने संबोधन में कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं, प्राकृतिक खेती की संभावनाओं और फसल विविधीकरण के फायदों पर प्रकाश डाला।

किसानों की शंकाओं का मौके पर समाधान

कार्यक्रम के अंतिम चरण में 'प्रश्न-उत्तर सत्र' आयोजित किया गया, जहाँ किसानों ने खेती से जुड़ी अपनी व्यावहारिक समस्याओं को रखा। कृषि वैज्ञानिकों ने मौके पर ही उनकी शंकाओं का समाधान करते हुए तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया।

उपस्थित किसानों ने इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताया और भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की आवश्यकता जताई। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ संगोष्ठी का समापन हुआ।