बड़वानी (मध्य प्रदेश): मायानगरी मुंबई की चकाचौंध, एक्टिंग का करियर और 'क्राइम पेट्रोल' जैसे लोकप्रिय सीरियल्स में काम करने का अनुभव... यह सब पीछे छोड़कर अगर कोई युवा अपने गाँव लौट आए, तो अक्सर लोग इसे कदम पीछे खींचना मानते हैं। लेकिन मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के तलुन गाँव के धीरज नागौर ने साबित कर दिया कि सही दिशा और वैज्ञानिक सोच हो, तो खेतों की हरियाली मुंबई के कैमरों की लाइट से कहीं अधिक मानसिक शांति और आर्थिक समृद्धि दे सकती है।

वर्ष 2011 में एक्टिंग का सपना लेकर मुंबई पहुँचे धीरज ने 'सावधान इंडिया', 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' और 'बेपनाह' जैसे टीवी शोज़ में काम किया। लेकिन 2018 आते-आते अकेलापन और घर की मिट्टी के खिंचाव के कारण वे अपने गाँव लौट आए। गाँव लौटने पर 35 एकड़ पुश्तैनी जमीन तो थी, लेकिन खेती का कोई अनुभव नहीं था।

एक साल का अध्ययन और जैन टिश्यू कल्चर केले की खोज गाँव लौटने के बाद धीरज ने जल्दबाज़ी नहीं की। उन्होंने पूरे एक साल (2018-2019) तक मिट्टी, मौसम और खेती की बारीकियों को समझा। पारंपरिक फसलों (कपास, मक्का, गेहूं) से अलग कुछ नया करने की तलाश में उन्होंने जैन टिश्यू कल्चर केले के खेतों का दौरा किया। पौधों की एकसमान ऊँचाई, चमकदार रंग और भारी-भरकम घौद (बंच) देखकर उन्होंने 17 मार्च 2020 को पहली बार अपने खेतों में जैन टिश्यू कल्चर केले के पौधों का रोपण किया।

वैज्ञानिक तकनीक, ड्रिप इरिगेशन और सटीक प्रबंधन धीरज नागौर अपनी इस सफलता का श्रेय वैज्ञानिक तकनीकों के सही इस्तेमाल को देते हैं:

  • फसल की दूरी और मौसम का संतुलन: गर्मी में हार्वेस्ट होने वाली फसल के लिए पौधों के बीच 5.5 × 5.5 फीट और ठंड/बारिश के लिए 5.5 × 6 फीट का अंतर रखा जाता है।
  • सटीक फर्टीगेशन: जैन ड्रिप इरिगेशन सिस्टम के जरिए सीधे जड़ों तक पानी और पोषक तत्व पहुँचाए जाते हैं। हर 8 दिन में मौसम के अनुसार क्रॉप-प्रोटेक्शन स्प्रे किया जाता है।
  • बंपर उत्पादन: गर्मी के मौसम में प्रति पौधा औसतन 28 से 30 किलो, बारिश में 25 से 27 किलो और सर्दियों में 21 से 23 किलो तक का बंच आसानी से प्राप्त होता है।

खेती से बदला जीवन और मिली पहचान धीरज का मानना है कि खेती कोई मजबूरी या केवल गुजारे का साधन नहीं, बल्कि एक कॉर्पोरेट बिजनेस की तरह लाभ देने वाला करियर बन सकता है। पिछले छह वर्षों में खेती की कमाई से उन्होंने:

  1. 2 एकड़ अतिरिक्त नई जमीन खरीदी।
  2. रहने के लिए प्लॉट लेकर पक्का मकान बनवाया और नई कार खरीदी।
  3. सिंचाई की स्थायी व्यवस्था के लिए कुएँ भी बनवाए।

‘अमित उद्यान रत्न पुरस्कार’ से सम्मानित कृषि क्षेत्र में धीरज के इस उत्कृष्ट और प्रेरणादायक कार्य के लिए 30 मई 2026 को हरियाणा के करनाल में आयोजित एक समारोह में हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा द्वारा उन्हें प्रतिष्ठित “अमित उद्यान रत्न पुरस्कार” से सम्मानित किया गया।

धीरज नागौर आज न केवल खुद सफल खेती कर रहे हैं, बल्कि अन्य किसानों को भी आधुनिक तकनीकों से जोड़ रहे हैं। उनका यह सफर देश के उन तमाम युवाओं के लिए एक प्रेरणा है जो अपनी मिट्टी से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने का सपना देखते हैं।