नई दिल्ली: अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में एक नया और निर्णायक अध्याय लिखा जा रहा है। विश्व की तीन बड़ी महाशक्तियां— अमेरिका, रूस और चीन— अब पृथ्वी की सीमाओं से बाहर निकलकर चंद्रमा की सतह पर अपने परमाणु रिएक्टर (Nuclear Reactors) स्थापित करने की होड़ में शामिल हो चुकी हैं। इस महात्वाकांक्षी कदम का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा पर स्थाई इंसानी बस्तियां (Human Habitations) बसाना, वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्रों का निर्माण करना और चांद के गर्भ में छिपे बेशकीमती प्राकृतिक संसाधनों का खनन करना है।

पानी, ऑक्सीजन और खनिजों के खनन का मास्टरप्लांस

वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष एजेंसियों की नजर मुख्य रूप से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव (South Pole) पर केंद्रित है। यहां के गहरे गड्ढों (Craters) में लाखों सालों से सूरज की रोशनी नहीं पहुंची है, जिसके कारण वहां विशाल मात्रा में पानी की बर्फ (Water Ice) मौजूद होने की प्रबल संभावना है।

  • पानी और ऑक्सीजन: इस बर्फ को पिघलाकर पीने योग्य पानी, सांस लेने के लिए ऑक्सीजन और हाइड्रोजन-ऑक्सीजन को अलग कर रॉकेट ईंधन तैयार किया जाएगा।
  • दुर्लभ खनिज: चंद्रमा की सतह एल्युमीनियम, टाइटेनियम, लोहे और सिलिकॉन जैसे खनिजों से समृद्ध है। इनका उपयोग अंतरिक्ष में ही सैटेलाइट्स, स्पेस स्टेशन और नए बेस बनाने के लिए किया जा सकता है, जिससे पृथ्वी से भारी सामान ले जाने का खर्च बचेगा।

सौर ऊर्जा के बजाय न्यूक्लियर पावर पर ही जोर क्यों?

चुनौती/कारकसौर ऊर्जा (Solar Power)परमाणु ऊर्जा (Nuclear Power)
चांद की रात (Lunar Night)चांद पर लगातार 14 दिनों तक अंधेरा रहता है, जहां सोलर पैनल पूरी तरह नाकाम हो जाते हैं।24x7 बिना रुके लगातार बिजली की निर्बाध आपूर्ति संभव।
ऊर्जा घनत्व (Energy Density)खनन और भारी मशीनों को चलाने के लिए भारी संख्या में पैनल और महंगी बैटरियों की जरूरत होती है।कम जगह में भारी मात्रा में बिजली उत्पादन क्षमता।
लागत और मेंटेनेंसपृथ्वी से विशाल सोलर पैनल और डीजल/बैटरियां भेजना बेहद खर्चीला है।एक बार स्थापित होने के बाद बिना रखरखाव के कई सालों तक कार्य करने में सक्षम।

बैंगोर यूनिवर्सिटी के न्यूक्लियर फ्यूचर्स इंस्टीट्यूट के निदेशक साइमन मिडलबर्ग के अनुसार, चांद पर बर्फ के खनन और वहां बने बेस को सुचारू रूप से चलाने के लिए कम से कम 3 से 4 परमाणु रिएक्टरों की जरूरत पड़ेगी।

अमेरिका बनाम रूस-चीन: कौन कितना आगे?

1. अमेरिका (नासा - NASA)
  • प्रोजेक्ट name: लूनर रिएक्टर-1 (Lunar Reactor-1)
  • लक्ष्य: 2030 के दशक के अंत तक।
  • क्षमता: 20 किलोवाट (kW) बिजली उत्पादन।
  • विशेषता: वजन 6,000 किलोग्राम से कम और बिना रखरखाव के लगातार 5 साल तक काम करने की क्षमता।
2. रूस और चीन का साझा प्रोजेक्ट
  • प्रोजेक्ट name: सेलेना (Selena)
  • लक्ष्य: 2036 तक चीन के नेतृत्व वाले 'इंटरनेशनल लूनर रिसर्च स्टेशन' (ILRS) के लिए।
  • क्षमता: 10 किलोवाट (kW) बिजली।
  • विशेषता: 1,100 से 1,300 किलोग्राम का हल्का रिएक्टर, जो बिना मेंटेनेंस 10 साल तक बिजली देगा।

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इतिहास: अंतरिक्ष में परमाणु ऊर्जा का पुराना नाता

अंतरिक्ष में न्यूक्लियर पावर का इस्तेमाल नया नहीं है। शीत युद्ध (Cold War) के दौरान सोवियत संघ ने 1960 से 1980 के दशक के बीच अपने जासूसी उपग्रहों (Reconnaissance Satellites) को संचालित करने के लिए 30 से अधिक परमाणु रिएक्टर कक्षा में भेजे थे। अमेरिका ने भी पिछले 70 वर्षों में अंतरिक्ष परमाणु परियोजनाओं पर लगभग 20 अरब डॉलर खर्च किए हैं, हालांकि 1965 में उनका एक प्रयोग तकनीकी खराबी के कारण 43 दिनों में विफल हो गया था।

रेडियोधर्मी दुर्घटना का खतरा और 'आउटर स्पेस ट्रीटी'

चंद्रमा पर परमाणु रिएक्टर ले जाने और उन्हें चालू करने में रेडियोधर्मी कचरे और दुर्घटना का बड़ा जोखिम है।

  • ऐतिहासिक उदाहरण: 1978 में सोवियत संघ का कॉसमॉस-954 उपग्रह दुर्घटनाग्रस्त होकर उत्तरी कनाडा में गिर गया था, जिससे लगभग 1.24 लाख वर्ग किमी क्षेत्र में रेडियोधर्मी विकिरण फैल गया था।
  • वैज्ञानिकों का मत: हालांकि, साइमन मिडलबर्ग के अनुसार चांद पर किसी दुर्घटना की स्थिति में वायुमंडल न होने के कारण प्रदूषण का असर बेहद सीमित क्षेत्र तक ही रहेगा।

कानूनी स्थिति: क्या चांद पर किसी देश का मालिकाना हक होगा?

1967 की अंतरराष्ट्रीय 'आउटर स्पेस ट्रीटी' (Outer Space Treaty) के अनुसार:

  1. कोई भी देश चंद्रमा या उसके किसी भू-भाग पर अपना संप्रभु मालिकाना हक स्थापित नहीं कर सकता।
  2. हालांकि, वहां भेजे गए उपकरणों, बेस और रिएक्टरों पर संबंधित देश का ही नियंत्रण रहेगा।
  3. यह संधि अंतरिक्ष में शांतिपूर्ण उद्देश्यों (Peaceful Uses) के लिए परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल या खनन पर रोक नहीं लगाती है।

इस प्रकार अमेरिका, रूस और चीन कानूनी रूप से चांद पर परमाणु रिएक्टर लगाकर संसाधनों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

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