नई दिल्ली:
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनाव आयोग पर वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) और रजिस्ट्रेशन नियमों में बदलाव के जरिए चुनावी निष्पक्षता से समझौता करने का गंभीर आरोप लगाया है। कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक को संबोधित करते हुए खरगे ने कहा कि पार्टी पर लोकतंत्र और संविधान की रक्षा करने की जिम्मेदारी है। उन्होंने ब्रिटिश शासन के दौरान वोटिंग अधिकारों के लिए कांग्रेस की लड़ाई और वोटर लिस्ट को लेकर चलाए जा रहे मौजूदा अभियान के बीच समानता बताई। खरगे ने ऐलान किया कि पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और सरकार के खिलाफ अपना अभियान और तेज करेगी।
बीजेपी के इशारे पर नाम हटाने का आरोप कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि बीजेपी और मोदी सरकार के इशारे पर वोटर लिस्ट से वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त सरकार की कठपुतली की तरह काम कर रहे हैं। इसके जवाब में चुनाव आयोग का कहना है कि उसके फैसलों को पूरी कानूनी मंजूरी मिली हुई है और आयुक्तों के बीच अलग-अलग राय होना संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा है।
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फॉर्म 6 में बदलाव और युवाओं के अधिकारों पर सवाल
नए वोटरों के रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6 में किए गए बदलावों पर सवाल उठाते हुए खरगे ने कहा कि इन नियमों से युवा वोटर अपने मताधिकार से वंचित हो सकते हैं। उन्होंने राजीव गांधी सरकार द्वारा 1988 में वोटिंग की उम्र 21 से घटाकर 18 साल करने के फैसले का जिक्र करते हुए कहा, "उन्होंने नौकरियां नहीं दीं और अब वे वोट देने का अधिकार भी नहीं देना चाहते।" उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं के सवालों से डरती है।
खरगे ने राहुल गांधी द्वारा महादेवपुरम, आलंद, हरियाणा और महाराष्ट्र में वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों को लेकर उठाए गए मुद्दों का समर्थन किया। उन्होंने डुप्लीकेट वोटर, संदिग्ध पते और एक ही पते पर कई वोटरों के नाम दर्ज होने जैसी शिकायतों पर कार्रवाई न करने के लिए चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।
एसआईआर प्रक्रिया और फैसले पर घेरा
खरगे ने एसआईआर से जुड़े फैसलों की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पूछा कि इस प्रक्रिया को किसने मंजूरी दी और क्यों दो चुनाव आयुक्तों को कथित तौर पर इंटरनल पोर्टल से दूर रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि दो चुनाव आयुक्तों ने खुद मुख्य चुनाव आयुक्त के कामों को मनमाना और अनुचित बताया था। खरगे ने नैतिक आधार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग की और कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनके दबाव में काम किया।
मौजूदा विवाद की तुलना 2016 की नोटबंदी से करते हुए खरगे ने कहा, "नोटबंदी के समय गरीब लोग लाइन में खड़े थे। वोट नोटबंदी में गरीबों को लाइन से ही बाहर कर दिया गया है।" उन्होंने बीजेपी और आरएसएस पर स्वतंत्र संस्थाओं को सुनियोजित तरीके से कमजोर करने का आरोप लगाया।
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कांग्रेस की पांच मुख्य मांगें:
- डेटा का सार्वजनिक होना: वोटर लिस्ट में किए गए बड़े बदलावों का पूरा डेटा सार्वजनिक किया जाए और जिन वोटरों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें पूरी जानकारी और अपील का अवसर मिले।
- आसान फॉर्मेट में डेटा: राजनीतिक दलों को समय पर और आसान फॉर्मेट में वोटर लिस्ट का डेटा उपलब्ध कराया जाए।
- इंडिपेंडेंट जांच: गंभीर गड़बड़ियों की तय समय-सीमा के भीतर स्वतंत्र जांच कराई जाए।
- पारदर्शिता: चुनाव से जुड़ा डेटा और फैसले पूरी तरह पारदर्शी हों ताकि जानकारी छिपाने का आरोप न लगे।
- सुरक्षित वोट का भरोसा: भारत के वोटरों को यह अटूट भरोसा होना चाहिए कि उनका वोट पूरी तरह सुरक्षित है।
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