झारखंड में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम अवैध रूप से हटाने की साजिश का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मांडर प्रखंड के सुरसा गांव स्थित बूथ नंबर 191 पर 35 वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काटने के लिए फर्जी फॉर्म-7 जमा कराए गए थे। हालांकि, बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की सतर्कता के कारण समय रहते इस साजिश का पर्दाफाश हो गया।

मामले से जुड़े मुख्य बिंदु:

  • फर्जी कारणों का सहारा: राजनीतिक दलों से जुड़े दो बूथ लेवल एजेंटों (BLA) ने 6 सितंबर को बीएलओ के पास 35 ग्रामीणों के नाम से फॉर्म-7 भरकर जमा किया था। इन आवेदनों में ग्रामीणों को गांव से अनुपस्थित या स्थायी रूप से स्थानांतरित (Shifted) दर्शाया गया था, जबकि वे सभी ग्रामीण वर्तमान में गांव में ही निवास कर रहे हैं।
  • BLO पर बनाया दबाव: आरोप है कि दोनों एजेंटों ने बीएलओ पर इन फर्जी फॉर्मों पर तुरंत हस्ताक्षर करने और प्रक्रिया आगे बढ़ाने का दबाव बनाया। बीएलओ को संदेह होने पर उन्होंने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया और पूरे मामले की जानकारी ग्रामीणों व प्रशासनिक अधिकारियों को दी।
  • ग्रामीणों का विरोध और प्रशासनिक शिकायत: घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों में भारी रोष फैल गया। बुधवार को 'अंजुमन इस्लामिया कमेटी, सुरसा' के नेतृत्व में ग्रामीणों ने मांडर की अंचल अधिकारी (CO) सह सहायक निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी चंचला कुमारी और स्थानीय थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपकर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।
  • प्रशासन का आश्वासन: बीएलओ ने सभी संदेहास्पद फॉर्म-7 अंचल अधिकारी के सुपुर्द कर दिए हैं। सीओ चंचला कुमारी ने ग्रामीणों को निष्पक्ष जांच कराने और साजिशकर्ताओं के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

चुनावी रिकॉर्ड को पारदर्शी बनाने के लिए चलाए जा रहे एसआईआर अभियान के बीच हुई इस घटना ने स्थानीय स्तर पर राजनीतिक एजेंटों द्वारा चुनावी प्रक्रिया में की जाने वाली गड़बड़ियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।