छत्तीसगढ़ में किसानों को निर्धारित दर पर गुणवत्तापूर्ण खाद उपलब्ध कराने और उर्वरक की कालाबाजारी, जमाखोरी व अवैध बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश और कृषि मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में कृषि विभाग ने प्रदेशभर में बड़ा प्रवर्तन अभियान चलाया है।
खरीफ 2026 के इस सीजन में अब तक उर्वरक संबंधी अनियमितताओं पर 516 मामलों में कड़ी कार्रवाई की जा चुकी है, जो खरीफ 2025 में हुई कुल 44 कार्रवाइयों की तुलना में करीब 10 गुना (472 मामले) अधिक है।
कार्रवाई के मुख्य आंकड़े (खरीफ 2026):
- 13 मामलों में FIR: गंभीर अनियमितता और कालाबाजारी में संलिप्त विक्रेताओं के खिलाफ 13 प्राथमिकी दर्ज कराई गई हैं।
- लाइसेंस रद्द व निलंबित: नियमों का उल्लंघन करने वाले 16 उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस पूरी तरह निरस्त किए गए हैं, जबकि 107 विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं।
- जब्ती और बिक्री पर रोक: 115 मामलों में अवैध या घटिया उर्वरक जब्त किया गया है, वहीं 193 मामलों में संदिग्ध खाद की बिक्री पर तत्काल प्रतिबंध लगाया गया है। 72 मामलों में न्यायालयीन कार्रवाई शुरू की गई है।
स्टॉक और दुकानों का औचक निरीक्षण:
कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ परदेशी के नेतृत्व में अधिकारियों की टीमें प्रदेशभर में खाद दुकानों और गोदामों का औचक (Surprise) निरीक्षण कर रही हैं। दुकानों पर स्टॉक बोर्ड, बिक्री रिकॉर्ड, मूल्य सूची और लाइसेंस दस्तावेजों की गहनता से जांच की जा रही है। सब्सिडी वाले उर्वरक की कालाबाजारी रोककर उसे असली किसानों तक पहुंचाना शासन की पहली प्राथमिकता है।
कृषि विभाग की किसानों से अपील:
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि खाद खरीदते समय हमेशा पक्की रसीद या बिल अवश्य लें। यदि कोई विक्रेता निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूलता है, जमाखोरी करता है या नकली खाद बेचता है, तो किसान तुरंत इसकी शिकायत अपने निकटतम कृषि कार्यालय या अधिकारी से करें।





