राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दशकों से लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों का मुख्य केंद्र रहे जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थलों की सूची से बाहर करने के केंद्र सरकार के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार और पुलिस का जवाब संतोषजनक नहीं होता है, तो कानून अपना काम करेगा।
नया आदेश और वैकल्पिक स्थल
हाल ही में दिल्ली पुलिस द्वारा जारी एक आदेश के तहत जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शनों के लिए अधिकृत स्थलों की सूची से हटा दिया गया है। इसके स्थान पर अब केवल निम्नलिखित तीन मैदानों को ही विरोध प्रदर्शन के लिए चिन्हित किया गया है:
- रामलीला मैदान
- बुराड़ी मैदान
- सीबीडी ग्राउंड (शाहदरा)
सरकार के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई, जिसमें नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों और विरोध प्रदर्शन के पारंपरिक स्थल को हटाने के औचित्य को चुनौती दी गई है।
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क्यों हटाया गया जंतर-मंतर को?
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को अवगत कराया कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने का निर्णय एक विशेष समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है।
गौरतलब है कि दिल्ली के मध्य में स्थित होने के कारण जंतर-मंतर हमेशा से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए आंदोलकारियों, राजनीतिक दलों और आम नागरिकों की पहली पसंद रहा है। हाल ही में जुलाई माह में नीट (NEET) पेपर लीक के खिलाफ यहां कई दिनों तक जोरदार प्रदर्शन हुए थे। इसके बाद विपक्ष और विभिन्न संगठनों द्वारा अन्य मुद्दों पर भी यहां प्रदर्शन की योजना बनाई गई थी, लेकिन पुलिस की सख्त पाबंदियों के कारण अनुमति नहीं दी गई, जिसके बाद यह मामला अदालत की देहरी तक जा पहुंचा।
न्यायपालिका पर दबाव के प्रयासों पर सख्त चेतावनी
सुनवाई के दौरान राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं द्वारा एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) अनियमितताओं के विरोध में सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए मार्च और राजनीतिक घटनाक्रम का मुद्दा उठा। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने दो-टूक शब्दों में टिप्पणी करते हुए कहा:
"कोई भी न्यायपालिका को दबाव में नहीं डाल सकता।"
वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने अदालत में राजनीतिक जुलूस और इस तरह के दबाव बनाने के प्रयासों पर चिंता जताई, जिस पर पीठ ने स्पष्ट किया कि अदालत बाहर हो रही हर गतिविधि से पूरी तरह अवगत है और ऐसे कमजोर प्रयासों का कोई असर नहीं पड़ता।
राहुल गांधी और अखिलेश यादव को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने और विरोध प्रदर्शन से जुड़ी याचिका पर संज्ञान लेते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और अन्य संबंधित नेताओं को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसके अलावा, अदालत ने 13 याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण पर भी कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि इस संबंध में अगली सुनवाई पर सवाल उठाए जाएंगे।
जंतर-मंतर डी-नोटिफिकेशन और महिला पत्रकार मामले में निर्देश
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी कड़े आदेश दिए:
- जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन: कोर्ट ने दिल्ली में जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शनों की तय सूची से हटाए जाने (डी-नोटिफिकेशन) को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने कहा कि इस अदालत के सामने हर आवाज कीमती है और सबकी बात सुनी जाएगी।
- महिला पत्रकार सुरक्षा: अदालत ने पुलिस को उस महिला पत्रकार के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई न करने का निर्देश दिया है, जिसने प्रदर्शन कवर करने के दौरान दिल्ली पुलिस के एसीपी विवेक भगत पर दुर्व्यवहार और यौन हमले का आरोप लगाया था।
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