स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आरोपों के खिलाफ 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) द्वारा 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से ठीक पहले राजनीतिक और प्रशासनिक टकराव तेज हो गया है। पार्टी ने दावा किया है कि इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोकने के लिए देश भर में बड़े पैमाने पर दमन किया जा रहा है।

10,000 लोगों को हिरासत में लेने का सनसनीखेज दावा

CJP के प्रवक्ता आशुतोष रंका ने शुक्रवार को दावा किया कि प्रदर्शन से पहले देश भर में कम से कम 10,000 लोगों को पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया है। उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और दिल्ली सहित कई राज्यों में पार्टी के सदस्यों, युवा कार्यकर्ताओं और प्रदर्शन में शामिल होने आ रहे लोगों को मनमाने ढंग से रोके जाने के आरोप लगाए गए हैं।

  • पुणे के छात्रों और नेताओं पर कार्रवाई: पार्टी के अनुसार, पुणे से दिल्ली विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने आ रहे छात्रों को बस सहित हिरासत में लेकर किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। इसके अलावा, राष्ट्रीय प्रवक्ता दीपक बालियान को भी गुरुवार को पुलिस हिरासत में लिया गया था, जिन्हें बाद में देर रात रिहा कर दिया गया। (हालांकि, दिल्ली पुलिस या किसी अन्य आधिकारिक स्रोत की ओर से हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या की पुष्टि अभी नहीं की गई है।)

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'क्यों न सीधे इमरजेंसी घोषित कर दी जाए?' - अभिजीत दीपके

राष्ट्रीय राजधानी में सार्वजनिक सभाओं पर लगाई गई पाबंदियों और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर कड़ा रोष व्यक्त करते हुए CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला।

गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने सवाल उठाया, "जंतर-मंतर भारत के लोगों का है, यह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नहीं है। अगर मुंबई और बेंगलुरु में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं, तो अमित शाह दिल्ली में इसकी इजाजत क्यों नहीं दे रहे हैं?" कार्यकर्ताओं को रोके जाने के एक वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने तंज कसा कि "क्यों न सीधे देश में इमरजेंसी ही घोषित कर दी जाए?"

CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने दो टूक शब्दों में कहा कि पार्टी का कोई भी सदस्य गिरफ्तारी या पुलिस कार्रवाई से डरने वाला नहीं है, और उनके बिना भी यह विरोध-प्रर्दशन पूरी ताकत से जारी रहेगा।

SIR और चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर आरोप

अभिजीत दीपके ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। उन्होंने इसे भारत के लोकतंत्र को खत्म करने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया।

  • जवाबदेही की मांग: दीपके ने स्पष्ट किया कि 10 अक्टूबर को होने वाले इस मार्च का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची से नाम हटाने के मामले को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार को जवाबदेह ठहराना है। साथ ही, उन्होंने देश के सभी राजनीतिक दलों, नागरिक समाज समूहों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से जनता के मताधिकार की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील की है।

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