रांची (झारखंड): मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सोमवार को राजधानी रांची में झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने जोरदार शक्ति प्रदर्शन किया। हजारों कांग्रेस कार्यकर्ताओं, मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ नेताओं ने पुराना विधानसभा मैदान से मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय तक पैदल मार्च निकाला और दफ्तर का घेराव किया।

गेट पर पुलिस से धक्का-मुक्की और पुतला दहन पैदल मार्च के बाद चुनाव आयोग कार्यालय पहुंचे कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उग्र प्रदर्शन किया। इस दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने परिसर के मुख्य गेट को तोड़ने का प्रयास किया, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी धक्का-मुक्की हुई। पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद कार्यकर्ता गेट के बाहर ही धरने पर बैठ गए और CEC ज्ञानेश कुमार का पुतला जलाकर अपनी नाराजगी जताई।

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दिग्गज नेताओं का तीखा हमला: 'वोट चोरी और बीजेपी एजेंट का आरोप' प्रदर्शन में शामिल झारखंड सरकार के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने आरोप लगाया कि CEC ज्ञानेश कुमार निष्पक्ष काम करने के बजाय बीजेपी के एजेंट की तरह काम कर रहे हैं, इसलिए उन्हें तुरंत पद छोड़ना होगा। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर, मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और विधायक राजेश कच्छप ने भी चुनाव आयोग पर लोकतंत्र को कमजोर करने और वोट चोरी का आरोप लगाते हुए उग्र आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी।

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14 आपत्तियों की मीडिया रिपोर्ट ने पकड़ा तूल विवाद की मुख्य वजह एक मीडिया रिपोर्ट है, जिसमें दावा किया गया है कि पिछले 10 महीनों के दौरान चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूची व SIR प्रक्रिया से जुड़े निर्णयों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं। हालांकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि ये आपत्तियां सामान्य आंतरिक विचार-विमर्श का हिस्सा थीं और पिछले एक वर्ष के सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। 26 सितंबर को तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच इस मसले पर बैठक भी हुई थी।

झारखंड कांग्रेस द्वारा SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर पहले भी ज्ञापन दिया जा चुका है, लेकिन रांची में हुए इस ताजा प्रदर्शन ने आयोग की कार्यप्रणाली पर चल रही राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।