नई दिल्ली:
चुनाव आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देश भर में राजनीतिक घमासान छिड़ गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनकी बर्खास्तगी की मांग को लेकर कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दलों ने देशभर में उग्र विरोध प्रदर्शन किया।
शुक्रवार को राजधानी दिल्ली से लेकर असम, बिहार, पंजाब और पश्चिम बंगाल तक सड़कों पर जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा मोर्चा खोले जाने के बाद कांग्रेस ने लखनऊ से लेकर जम्मू तक सड़कों पर उतरकर प्रचंड विरोध प्रदर्शन किया है। कार्यकर्ता 'वोट चोर, गद्दी छोड़' के नारों के साथ चुनाव आयोग के कार्यालयों का घेराव कर रहे हैं। बढ़ते विवाद और विरोध को देखते हुए CEC ज्ञानेश कुमार ने अपने आगामी वाराणसी और मेरठ दौरे रद्द कर दिए हैं।
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सड़क से लेकर थाने तक घेराबंदी
विपक्ष इस मुद्दे पर चौतरफा हमला बोल रहा है:
- कांग्रेस का देशव्यापी मार्च: जम्मू-कश्मीर कांग्रेस प्रभारी नासिर हुसैन की अगुवाई में कार्यकर्ताओं ने जम्मू निर्वाचन भवन का घेराव किया। कांग्रेस का स्पष्ट कहना है कि जब तक CEC को पद से हटाकर आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया जाता, आंदोलन जारी रहेगा। 28 सितंबर को जिला स्तर पर भी प्रदर्शन की योजना है।
- CJP की चेतावनी: संगठन 'सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस' (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है, जो आज समाप्त हो रहा है। पद न छोड़ने पर दिल्ली में अनिश्चितकालीन धरने और राष्ट्रव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
- महुआ मोइत्रा की पुलिस शिकायत: तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा ने दिल्ली के संसद मार्ग थाने में CEC के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने के लिए शिकायत सौंपी है।
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कई राज्यों में उग्र प्रदर्शन, गौरव गोगोई समेत कई नेता हिरासत में
देश के अलग-अलग हिस्सों में विपक्षी कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी झड़पें हुईं:
- असम (गुवाहाटी): विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे असम कांग्रेस प्रमुख गौरव गोगोई और कई वरिष्ठ नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
- चंडीगढ़ और पटना: चुनाव आयोग कार्यालयों की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने और तितर-बितर करने के लिए पुलिस को वॉटर कैनन (पानी की बौछार) का इस्तेमाल करना पड़ा।
- नई दिल्ली: दिल्ली स्थित मुख्य चुनाव आयोग के दफ्तर और जंतर-मंतर के बाहर भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया, जहां भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) के कार्यकर्ताओं ने जोरदार घेराव किया। इसके अलावा मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल में भी व्यापक विरोध रैलियां निकाली गईं।
विवाद की असल वजह: 10 महीनों में 14 बार आपत्तियां
यह राजनीतिक भूचाल एक मीडिया रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयोग के दो अन्य सदस्यों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में 14 बार SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों पर गंभीर आपत्तियां जताई थीं।
इन चिंताओं में मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दे शामिल थे:
- नए मतदाताओं का पंजीकरण
- मतदाता सूची से नाम जोड़ना और हटाना
- चुनाव आयोग के मुख्य डेटाबेस तक पहुंच
राहुल गांधी का हमला: "चुनावों में हुई धांधली"
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर बेहद हमलावर रुख अपनाया। उन्होंने '100% निश्चितता' के साथ आरोप लगाया कि 2024 के लोकसभा चुनाव सहित कई हालिया विधानसभा चुनावों में भारी धांधली की गई थी। राहुल गांधी ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि "जो व्यक्ति जनता के वोट पर हमला करता है और लोकतंत्र को तबाह करता है, वह देशद्रोही है।"
चुनाव आयोग की सफाई: "फैसले सर्वसम्मति से हुए"
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने आंतरिक असहमति और मतभेदों के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। आयोग ने एक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि किसी भी बहु-सदस्यीय संस्था में प्रशासनिक सुझाव, विचार-विमर्श और फीडबैक एक सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं। आयोग ने जोर देकर कहा कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़े सभी अंतिम फैसले आयोग के सदस्यों की पूर्ण सर्वसम्मति से ही लिए गए थे।
विवाद की असल वजह
इस पूरे राजनीतिक बवाल की नींव एक रिपोर्ट के बाद पड़ी, जिसमें दावा किया गया कि पिछले 10 महीनों में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) तथा मतदाता सूची से नाम जोड़ने-हटाने से जुड़े फैसलों पर कम से कम 14 बार अपनी लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं। विपक्ष का आरोप है कि अन्य दो आयुक्तों की असहमति को दरकिनार कर एकतरफा फैसले लिए गए।
चुनाव आयोग का पक्ष
दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए स्थिति साफ की है। आयोग का कहना है कि चुनाव निकाय के भीतर आंतरिक विचार-विमर्श, अलग-अलग राय और लिखित टिप्पणियां एक सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि सभी अंतिम निर्णय तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति और मंजूरी से ही लागू किए गए हैं।





