तिरुवनंतपुरम: केरल सरकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ उनके एक पुराने कार्यकाल से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामलों की जांच का रास्ता साफ कर दिया है। केरल सरकार ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राज्य के सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (VACB) से जांच कराने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है। यह पूरा मामला उस समय का है जब ज्ञानेश कुमार केरल में लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव के पद पर कार्यरत थे।
मंत्री रमेश चेन्निथला का बयान और कानूनी राय
केरल के मंत्री रमेश चेन्निथला ने इस मामले की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार को इस फाइल के साथ महत्वपूर्ण कानूनी राय भी प्राप्त हुई थी। कानूनी जानकारों की सलाह के बाद कि सरकार की पूर्व मंजूरी के साथ इस मामले की जांच की जा सकती है, मुख्यमंत्री के साथ आवश्यक चर्चा के बाद मंगलवार शाम को जांच की आधिकारिक अनुमति दे दी गई है। अब विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो इन सभी गंभीर आरोपों की विस्तृत और निष्पक्ष जांच करेगा।
क्या है 2 करोड़ रुपये की रिश्वत का पूरा मामला?
मंत्री रमेश चेन्निथला के अनुसार, सरकार को ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दो अलग-अलग याचिकाएं प्राप्त हुई हैं, जिनमें से एक याचिका एमवी अनूप गोपाल और दूसरी सज्जन कुमार द्वारा दाखिल की गई है।
- परियोजना और कंसोर्टियम: सज्जन कुमार की शिकायत के मुताबिक, यह मामला 'PATI-BEL' नामक कंसोर्टियम से जुड़ा हुआ है, जिसमें मलेशिया और केरल की दो कंपनियां शामिल थीं। यह कंसोर्टियम केरल में तिरुवनंतपुरम से अंगमाली तक 'मेन सेंट्रल रोड परियोजना' (Main Central Road Project) पर कार्य कर रहा था। इस पूरी परियोजना को एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) द्वारा वित्तीय सहायता मिल रही थी।
- रिश्वत मांगने का आरोप: शिकायतकर्ता का मुख्य आरोप है कि इस परियोजना से जुड़े हुए बिलों का भुगतान जानबूझकर रोक दिया गया था। सज्जन कुमार का दावा है कि उस समय के PWD सचिव ज्ञानेश कुमार ने इन रुके हुए बिलों को पास करने और भुगतान जारी करने के एवज में 2 करोड़ रुपये की रिश्वत की मांग की थी।
मलेशियाई प्रोजेक्ट अधिकारी की आत्महत्या का गंभीर संदर्भ
इस पूरे प्रकरण में मलेशियाई कंपनी के एक प्रोजेक्ट अधिकारी ली सी बीन की आत्महत्या का भी विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। मंत्री रमेश चेन्निथला के अनुसार, घटना के समय ऐसे आरोप सामने आए थे कि PWD द्वारा समय पर बिलों का भुगतान न किए जाने के कारण संबंधित कंपनी पर गहरा आर्थिक दबाव और संकट बढ़ गया था। ली सी बीन की दुखद मृत्यु के पश्चात, उनके परिवार द्वारा कंपनी के अन्य कर्मचारियों को कथित तौर पर यह जानकारी दी गई थी कि उनके सुसाइड नोट में ज्ञानेश कुमार का नाम व जिक्र था।
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भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत मिली मंजूरी
कानूनी प्रावधानों के तहत, केरल सरकार के मंत्रियों और अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की धारा 17A के अंतर्गत इस प्रकार के मामलों में जांच शुरू करने के लिए सरकार की पूर्व अनुमति अनिवार्य होती है। विजिलेंस विभाग ने कानूनी विशेषज्ञों से राय लेने के बाद सरकार के पास इसकी संस्तुति भेजी थी, जिसके आधार पर मुख्यमंत्री से विचार-विमर्श के बाद यह मंजूरी जारी की गई है।
मंत्री रमेश चेन्निथला ने यह भी कहा कि इन تمام गंभीर आरोपों की विस्तृत रूप से तह तक जाकर जांच करना अब विजिलेंस ब्यूरो की जिम्मेदारी है। जांच एजेंसी को यह अधिकार है कि वह शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों, दस्तावेजों और साक्ष्यों की गहराई से पड़ताल करे।
पहले भी शुरू हुई थी जांच, जो बाद में हुई थी बंद
उल्लेखनीय है कि ज्ञानेश कुमार के PWD सचिव रहने के दौरान सड़क परियोजनाओं में कथित वित्तीय अनियमितताओं का यह मामला नया नहीं है, बल्कि यह पहले भी सुर्खियों में रह चुका है। वर्ष 2006 में मलेशियाई इंजीनियर ली सी बीन की मृत्यु के बाद विजिलेंस जांच की प्रक्रिया शुरू की गई थी। हालांकि, उस समय पुख्ता सबूतों या आरोपों की पुष्टि न होने के कारण आगे की कानूनी कार्रवाई रोक दी गई थी। अब नई शिकायतों के आधार पर इस मामले की फाइलों को दोबारा खोलकर जांच को नए सिरे से आगे बढ़ाया जा रहा है। इस मौजूदा जांच के दौरान यह भी परखा जाएगा कि पूर्व की पड़ताल के दौरान शिकायतकर्ताओं और अन्य संबंधित पक्षों के बयान ठीक प्रकार से दर्ज किए गए थे या नहीं।
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