रांची: झारखंड में फर्जीवाड़ा रोकने और पात्र गरीबों तक योजना का लाभ पहुंचाने के लिए खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत राज्य में पंजीकृत अपात्र लाभुकों की पहचान कर लगभग 1.63 लाख (26 प्रतिशत) लोगों के नाम राशन सूची से हटा दिए गए हैं। केंद्र सरकार के निर्देश पर की जा रही इस कार्रवाई से फर्जी तरीके से मुफ्त राशन ले रहे लोगों में हड़कंप मच गया है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि 'वन नेशन वन राशन कार्ड' व्यवस्था के तहत हर योग्य व्यक्ति को राशन मिलेगा, लेकिन अपात्रों के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
इन लोगों पर गिरी गाज
- सरकारी कर्मचारी और पीएफ धारक: ऐसे लोग जो विभिन्न सरकारी नौकरियों में कार्यरत हैं और जिनका नियमित पीएफ (PF) कट रहा था, फिर भी वे मुफ्त राशन ले रहे थे।
- 6 महीने से निष्क्रिय कार्डholder: जिन्होंने पिछले लगातार छह महीनों से अपने राशन का उठाव नहीं किया था।
- बड़े करदाता (GST Payers): ऐसे व्यवसायी या व्यक्ति जिन्होंने बीते एक वर्ष में 25 लाख रुपये से अधिक का जीएसटी (GST) रिटर्न दाखिल किया है।
- डाक सेवा से जुड़े नाम: पोस्टल डेटा के सत्यापन में चिह्नित किए गए 808 लोगों के नाम भी सूची से बाहर कर दिए गए हैं।
ऐसे हो रही अपात्रों की पहचान
राज्य सरकार ने अपात्र लाभुकों को ट्रैकिंग और डिजिटल सत्यापन के माध्यम से चिह्नित किया है। इसके लिए एक विशेष 'पात्रता ट्रैकिंग फॉर्मूला' तैयार किया गया है, जो लाभुकों के हालिया लेनदेन, आय और पीएफ डेटा की जांच करता है।
केंद्र सरकार द्वारा लागू 'NFSA-2' प्रणाली के तहत ऐसे सभी अयोग्य नामों को सिस्टम अपने आप (Auto-delete) सूची से बाहर कर रहा है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, 26 अगस्त की तय समय-सीमा तक 6.29 लाख चिह्नित अपात्रों में से 26 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया गया है।
तकनीक और पारदर्शिता पर जोर
सरकार ने फर्जीवाड़े पर पूरी तरह से नकेल कसने के लिए ऑटोमेटेड 'पात्रता ट्रैकिंग फॉर्मूला' लागू किया है, जिसके माध्यम से लाभुक के हालिया वित्तीय लेनदेन, सब्सिडी कोटा और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
साथ ही, केंद्र सरकार 'वन नेशन वन राशन कार्ड' योजना को तेजी से बढ़ावा दे रही है ताकि पात्र और जरूरतमंद नागरिक देश में कहीं भी अपनी सुविधा अनुसार राशन प्राप्त कर सकें। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि योग्य और गरीब परिवारों के हक का राशन किसी भी सूरत में अपात्रों के हाथों में नहीं जाने दिया जाएगा।





