प्रतिनिधि,जमशेदपुर।भारतीय खान ब्यूरो (आईबीएम), भुवनेश्वर क्षेत्र के तत्वावधान में रविवार को आयोजित 24वें खान पर्यावरण और खनिज संरक्षण (एमईएमसी) सप्ताह 2022-23 में ओडिशा में टाटा स्टील की आयरन ओर और मैंगनीज माइंस ने कुल 12 पुरस्कार अपने नाम किए। वहीं टाटा स्टील की जोड़ा ईस्ट आयरन ओर माइन को ग्रुप 1 की श्रेणी के तहत खनिज संरक्षण में प्रथम, समग्र प्रदर्शन में द्वितीय और सस्टेनेबल डेवलपमेंट में तृतीय पुरस्कार मिला।
इसी तरह खोंदबोंद आयरन ओर व मैंगनीज माइंस को खनिज संरक्षण में द्वितीय और खनिज परिष्करण में तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अलावा टाटा स्टील की काटा माटी आयरन माइन ने पर्यावरणीय निगरानी में द्वितीय पुरस्कार भी जीता।साथ ही ग्रुप 4 में जोडा वेस्ट मैंगनीज माइन को वनीकरण में प्रथम, समग्र निष्पादन में प्रथम, रिक्लेमेशन एवं रिहैबिलिटेशन में द्वितीय और प्रचार प्रसार में तृतीय पुरस्कार प्राप्त हुआ। जबकि बामेबारी माइन को डंप रिक्लेमेशन में प्रथम पुरस्कार और तिरिंगपहाड़ माइन को खनिज परिष्करण में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वहीं व्यक्तिगत श्रेणी में अभिषेक पांडा, सीनियर मैनेजर (माइनिंग) खोंदबोंद माइन को पर्यावरण बंधु पुरस्कार से नवाजा गया। संबंधित खानों के अधिकारियों को मुख्य अतिथि आईबीएम के चीफ कंट्रोलर ऑफ माइंस (स्वतंत्र प्रभार) पंकज कुलश्रेष्ठ द्वारा पुरस्कार दिया गया।
इस अवसर पर कुलश्रेष्ठ ने कहा कि भारत सरकार के नेट जीरो उत्सर्जन लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में हमें नेट-जीरो यात्रा में तेजी लाने में मदद करने के लिए अधिक शमन परियोजनाओं और कार्बन तटस्थता को विकसित करने की आवश्यकता है। मौके पर आईबीएम के पूर्वी क्षेत्र के कंट्रोलर ऑफ माइंस वाईजी काले, आरएल मोहंती, अध्यक्ष, पूर्वी क्षेत्र खनन संघ, बीएल गुर्जर, क्षेत्रीय खान नियंत्रक, भुवनेश्वर क्षेत्र, सरोज बनर्जी, चीफ, जोड़ा ईस्ट आयरन माइन, टाटा स्टील, शिरीष शेखर, चीफ, काटा माटी आयरन माइन, जीवी सत्यनारायण, चीफ, खोंदबोंद आयरन माइन, सभी खदानों के ऑपेरशन हेड, विभिन्न खानों के अधिकारी समेत यूनियन के सदस्य और प्रतिनिधि भी मौजूद थे। बता दें कि टाटा स्टील दुनिया भर में फैले अपने परिचालन के माध्यम से सस्टेनेबल खनन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही उच्चतम अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार प्रमाणित, कंपनी उन्नत प्रौद्योगिकियों के माध्यम से रॉ मैटेरियल की दक्षता और संरक्षण सुनिश्चित करती है।





