वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और चीन को व्यापार शुल्कों (ट्रेड टैरिफ) में बड़ी राहत देने की घोषणा की है। इसके साथ ही उन्होंने रूस से जुड़े कई प्रतिबंधों और शुल्कों को भी फिलहाल हटा दिया है। अमेरिका के इस कदम से भारत और चीन के व्यापारिक हितों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
शुक्रवार देर रात जारी एक कार्यकारी आदेश के तहत राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि चर्चित 'ग्राहम एक्ट' (Graham Act) के अंतर्गत आने वाले प्रतिबंधों और शुल्कों को लागू करने से छूट दी जा रही है। उन्होंने इस संबंध में कांग्रेस को एक प्रमाण-पत्र भी सौंपा है, जिसमें इस निर्णय को 'राष्ट्रहित में उठाया गया कदम' बताया गया है।
क्या था 'ग्राहम एक्ट' का प्रावधान?
दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के समर्थन वाले इस कानून का उद्देश्य अमेरिका को व्यापारिक नुकसान से बचाना और रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाना था। इस सख्त कानून के प्रावधानों के तहत:
- रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% से लेकर 500% तक का भारी-भरकम टैरिफ लगाया जाना था।
- रूस से कच्चे तेल का आयात करने वाले शीर्ष पांच देशों—चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान—को इस आर्थिक शिकंजे का सामना करना पड़ सकता था।
- हालांकि, उन देशों को छूट का प्रावधान था जो अपनी कुल आवश्यकता का मात्र 15% ही तेल आयात करते हैं। (बता दें कि चीन के बाद भारत रूसी कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है।)
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भविष्य को लेकर संशय बरकरार
यह अहम आदेश ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और रूस के बीच बढ़ती नजदीकियों की चर्चा है, साथ ही वह यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की की आलोचना भी कर चुके हैं। ट्रंप इससे पहले रूस और यूक्रेन दोनों से युद्ध रोकने की अपील कर चुके हैं।
हालांकि, जानकारों का मानना है कि रूस से जुड़े टैरिफों पर यह रोक केवल कुछ समय के लिए हो सकती है। भविष्य में नफा-नुकसान की समीक्षा के बाद राष्ट्रपति ट्रंप इसे दोबारा लागू भी कर सकते हैं, इसलिए इस रोक के लंबे समय तक टिकने को लेकर अभी संशय बना हुआ है।
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