नई दिल्ली:
आज के दौर में हमारा जीवन पूरी तरह से इंटरनेट पर निर्भर हो चुका है—चाहे वह ऑनलाइन पढ़ाई हो, डिजिटल पेमेंट, ऑफिस का काम या सोशल मीडिया पर अपटेड रहना। ऐसे में जब किसी इलाके में अचानक इंटरनेट सेवाएं बंद (Internet Shutdown) कर दी जाती हैं, तो आम जनजीवन थम सा जाता है। हाल ही में दिल्ली के कुछ हिस्सों में विरोध प्रदर्शनों के दौरान इंटरनेट रोके जाने के बाद यह बहस फिर तेज हो गई है कि आखिर देश और दुनिया में इस तरह के कदम क्यों उठाए जाते हैं।
आइए जानते हैं कि वैश्विक स्तर पर इंटरनेट शटडाउन के मामलों में कौन सा देश पहले नंबर पर है और भारत की स्थिति इसमें क्या कहती है।
दुनिया में सबसे ज्यादा इंटरनेट शटडाउन कहां होता है?
वैश्विक रिपोर्ट्स और आंकड़ों के मुताबिक, इंटरनेट शटडाउन के मामलों में देशों की रैंकिंग इस प्रकार है:
- म्यांमार (Myanmar): वैश्विक स्तर पर इंटरनेट बंद करने के मामलों में म्यांमार पहले स्थान पर बना हुआ है।
- भारत (India): इस मामले में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में भारत की हिस्सेदारी में कमी दर्ज की गई है।
- पाकिस्तान (Pakistan): इंटरनेट शटडाउन के मामलों में पाकिस्तान तीसरे स्थान पर है।
आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक इंटरनेट शटडाउन में अकेले भारत की हिस्सेदारी लगभग 20-21% के आसपास रही है। देश में 2016 से 2025 के बीच सबसे अधिक इंटरनेट बंद करने की घटनाएं जम्मू-कश्मीर में दर्ज की गई हैं।
भारत में इंटरनेट शटडाउन का ट्रेंड और आंकड़े
भारत में पिछले कुछ सालों में इंटरनेट बंद करने के कुल मामलों में भले ही कुछ गिरावट आई हो, लेकिन यह समस्या अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है:
- ऐतिहासिक तुलना: साल 2016 में दुनियाभर में जितने इंटरनेट शटडाउन हुए थे, उनमें अकेले भारत की हिस्सेदारी 35% से अधिक थी। यह आंकड़ा 2020 में बढ़कर 60% के पार पहुंच गया था।
- हालिया स्थिति: इसके बाद इसमें लगातार गिरावट आई और 2022 में यह घटकर 41%, तथा हालिया वर्षों में यह लगभग 20-21% के आसपास रह गई है।
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भारत में इंटरनेट शटडाउन की मुख्य वजहें क्या हैं?
भारत में इंटरनेट सेवाएं बाधित किए जाने के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित कारण सामने आए हैं:
- विरोध प्रदर्शन (Protests): साल 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, इंटरनेट बंद किए जाने के कुल मामलों में 45% से ज्यादा घटनाएं विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी थीं, जबकि 2021 में यह आंकड़ा 10% से भी कम था।
- सांप्रदायिक तनाव और हिंसा: कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा इंटरनेट बंद किया जाता है। सांप्रदायिक हिंसा के कारण इंटरनेट बंद होने की हिस्सेदारी 2021 के 6% से बढ़कर बाद के वर्षों में करीब 25% तक पहुंच गई।
अधिकारियों का तर्क होता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा, जनजीवन की रक्षा और असामाजिक तत्वों द्वारा फैलाई जाने वाली अफवाहों को रोकने के लिए कई बार यह 'कड़ा कदम' उठाना जरूरी हो जाता है, हालांकि डिजिटल अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि इससे आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों और आर्थिक गतिविधियों पर बुरा असर पड़ता है।
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