वाशिंगटन:

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे लंबे युद्ध को समाप्त कराने के प्रयासों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले पर एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान दिया है। ट्रंप ने इस युद्ध को खत्म करने की पूरी जिम्मेदारी सीधे तौर पर यूक्रेन के कंधों पर डाल दी है। उन्होंने तर्क दिया है कि रूस इस जंग में अधिक शक्तिशाली स्थिति में है और उसने कई नए क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया है।

ओवल ऑफिस में ट्रंप की दो टूक

ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि इस जंग में यूक्रेन रूस से पिछड़ रहा है और मॉस्को एक "बड़ी मशीन" की तरह लगातार आगे बढ़ता जा रहा है।

  • यूक्रेन पर डाला दबाव: ट्रंप ने कहा कि चूंकि कीव अपनी स्थिति बनाए रखने में नाकाम साबित हो रहा है, इसलिए अब यूक्रेन को खुद इस जंग को खत्म करने की इच्छा जतानी होगी।
  • आर्थिक मदद पर सवाल: अमेरिका द्वारा यूक्रेन को दी जा रही भारी-भरकम आर्थिक और सैन्य मदद पर सवाल उठाते हुए ट्रंप ने कहा कि इसके बदले में वाशिंगटन को सिर्फ "दुख, मौत और भारी आर्थिक नुकसान" के अलावा कुछ हासिल नहीं हुआ है।

इससे पहले नॉर्वे के ओस्लो में अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकोफ और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के बीच मुलाकात हुई थी, जिसका उद्देश्य रूस के ताजा हमलों को रोकना था।

पुतिन और जेलेंस्की की नफरत बनी बातचीत में दीवार

जंग रोकने को लेकर अब तक किसी भी ठोस समझौते पर सहमति न बन पाने की वजह बताते हुए ट्रंप ने कहा कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के बीच गहरी दुश्मनी है। दोनों नेताओं के बीच की यह नफरत ही एक टेबल पर आकर शांति वार्ता करने में सबसे बड़ी बाधा बन रही है।

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रूस के प्रति नरम रुख क्यों अपना रहे हैं ट्रंप?

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बदला हुआ रुख अचानक नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई भू-राजनीतिक और घरेलू कारण हैं:

  1. घरेलू महंगाई और तेल नीति: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के कारण अमेरिकी बाजार में ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। इस महंगाई से निपटने के लिए ट्रंप ने रूस से डीजल खरीद को हरी झंडी दे दी है, जिससे अन्य देशों को भी राहत मिली है।
  2. आगामी मिड-टर्म चुनाव: अगले महीने अमेरिका में मिड-टर्म चुनाव होने हैं, जहां ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी की स्थिति को मजबूत करने के लिए आर्थिक मोर्चे पर राहत देना बेहद जरूरी हो गया है। इसी राजनीतिक दबाव के चलते रूस पर लगे प्रतिबंधों के मामले में नरमी बरती जा रही है।

ट्रंप ने सत्ता में आने पर इस युद्ध को कुछ ही समय में खत्म करने का दावा किया था, लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी सफलता न मिलने पर अब उन्होंने इस जंग से दूरी बनाते हुए इसका दारोमदार पूरी तरह से यूक्रेन पर छोड़ दिया है।

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