पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी तूफान खड़ा हो गया है। विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद दो फाड़ हुई तृणमूल कांग्रेस (TMC) के असली मालिकाना हक को लेकर लड़ाई अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। पार्टी के नाम और उसके आधिकारिक चुनाव चिन्ह पर कब्जे को लेकर चुनाव आयोग (EC) ने ममता बनर्जी नीत तृणमूल कांग्रेस को दोबारा समन जारी किया है। आयोग ने ममता गुट से 16 सितंबर को दोपहर 3 बजे तक अपना लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

यह खींचतान ठीक उसी तर्ज पर आगे बढ़ रही है, जैसे महाराष्ट्र में शिवसेना के विभाजन के दौरान देखने को मिली थी। तृणमूल कांग्रेस में ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में 65 विधायकों का खेमा अलग हो चुका है। दोनों ही गुट खुद को 'असली तृणमूल' बताते हुए पार्टी के नाम और सिंबल पर अपना दावा ठोक रहे हैं।

  • दिल्ली में आमना-सामना: शनिवार (12 सितंबर) को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय चुनाव आयोग के समक्ष दोनों गुटों का आमना-सामना हुआ, जहां दोनों पक्षों ने अपने समर्थन में जरूरी दस्तावेज जमा किए।
  • दस्तावेज़ों की समीक्षा: आयोग ने विरोधी खेमे द्वारा सौंपे गए दस्तावेजों की प्रतियां ममता बनर्जी गुट को सौंपते हुए विस्तृत जवाब मांगा है। इसके लिए तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी को ईमेल और ममता बनर्जी को आधिकारिक पत्र भेजा गया है।
  • आगे की सुनवाई का शेड्यूल: यदि 16 सितंबर के जवाब से आयोग संतुष्ट नहीं होता है, तो 17 सितंबर को शाम 4 बजे नई दिल्ली के अशोक रोड स्थित चुनाव आयोग कार्यालय में अगली सुनवाई हो सकती है।

उपचुनाव के मोर्चे पर फंसा पेंच

आयोग द्वारा तय की गई 16 सितंबर की समयसीमा राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है, क्योंकि इसी दिन राज्य की हाई-प्रोफाइल सीट नंदीग्राम और रेजिनगर उपचुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तारीख है। दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होना है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या चुनाव आयोग 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनावों से पहले 'असली तृणमूल' का फैसला सुनाएगा, या फिर कानूनी जटिलताओं को देखते हुए शिवसेना मामले की तरह तृणमूल कांग्रेस के नाम और सिंबल को फिलहाल के लिए 'फ्रीज' (जब्त) कर देगा। आयोग के रुख पर राज्य के दोनों खेमों की नजरें टिकी हुई हैं।