राजधानी दिल्ली में पिछले साल हुए भीषण वाहन-जनित आईईडी (VBIED) विस्फोट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। एनआईए की जांच के अनुसार, 10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास हुए इस आत्मघाती हमले का मूल निशाना लाल किला न होकर चांदनी चौक स्थित ऐतिहासिक 'श्री दिगंबर जैन लाल मंदिर' था।
एनआईए जांच के मुख्य बिंदु
- सुरक्षा बलों की सतर्कता से टली बड़ी तबाही: 10 नवंबर की शाम 6:37 बजे संदिग्ध आई-20 कार को लाल मंदिर के बेहद करीब देखा गया था। आत्मघाती हमलावर उमर-उन-नबी कार को मंदिर के पास पार्क करने की कोशिश में था, लेकिन इलाके में भारी ट्रैफिक और पुलिस बल की मुस्तैदी के कारण वह वहां गाड़ी खड़ी नहीं कर सका।
- 13 मिनट में बदला रास्ता: मंदिर के पास नाकाम रहने पर हमलावर ने यू-टर्न लिया और गाड़ी को लाल किले के गेट नंबर 4 की तरफ मोड़ दिया। ठीक 13 मिनट बाद, शाम 6:50 बजे कार में रखा आईईडी धमाका कर दिया गया।
- आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश: एनआईए ने आरोपपत्र में मृतक हमलावर उमर-उन-नबी को 'अंसार गजवात-उल-हिंद' के पुनर्जीवित आतंकी मॉड्यूल का ऑपरेशनल इंचार्ज करार दिया है। वह 2022 से निष्क्रिय पड़े इस नेटवर्क को दोबारा सक्रिय करने में जुटा था।
जान-माल का भारी नुकसान
दिल्ली के इस पहले वाहन-जनित आतंकी हमले में 11 मासूम लोगों की जान चली गई थी, जबकि 29 अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। एनआईए रिपोर्ट के अनुसार, इस भयावह विस्फोट से आसपास की संपत्तियों को लगभग 17.7 लाख रुपये का आर्थिक नुकसान भी पहुंचा था। चार्जशीट से साफ है कि यदि पुलिस की सजगता के कारण हमलावर को अपना प्लान बदलने पर मजबूर न होना पड़ता, तो चांदनी चौक के व्यस्त और संकरे इलाके में तबाही का दायरा और भी भयावह हो सकता था।





