प्रतिनिधि,सिंदरी।वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार, विकास आयुक्त हस्तशिल्प, हस्तशिल्प सेवा केंद्र देवघर द्वारा भारतीय हस्तशिल्प को बढ़ावा एवं संवर्धन हेतु विद्यापति परिषद सिंदरी में आयोजित दो दिवसीय शिल्प प्रदर्शनी कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सिंदरी शहर के गणमान्य लोग एवं सरस्वती विद्या मंदिर सिंदरी के विद्यार्थी और शिक्षकगण के साथ डीएवी पब्लिक स्कूल के छात्र-छात्रा व शिक्षकगण ने झारखंड एवं पश्चिम बंगाल की हस्तशिल्प की जीवंत प्रदर्शन को देखा एवं शिल्प के सांस्कृतिक विरासत को समझा। हस्तशिल्पियों ने आगंतुकों से अपने अनुभव साझा किए और शिल्प निर्माण के रचनात्मक प्रक्रिया को बताया।





कार्यक्रम में बलियापुर धनबाद स्थित घोंघाबद गांव के बांस शिल्प, हजारीबाग का सोहराय लोकचित्रकाला, बर्धमान का शोलापीठ, पश्चिम बंगाल दरियापुर का डोकरा शिल्प, दुमका के जादोपटिया शिल्प इत्यादि के जीवंत प्रदर्शनी मुख्य आकर्षण का केंद्र रहे। हज़ारीबाग से आये हुए डोकरा एवं बांस शिल्प ने जीवंत प्रदर्शन कर छात्र-छात्रों को आकर्षित किया।हस्तशिल्पियों द्वारा बनाए गए विभिन्न शिल्पों को लोगों ने खूब पंसद किया और ख़रीदारी भी की।





कार्यक्रम का उद्घाटन आशुतोष कुमार, प्राचार्य, डीएवी पब्लिक स्कूल सिंदरी, रवि कुमार, ज़िला युवा पदाधिकारी, नेहरू युवा केन्द्र संगठन, दीपक कुमार, सहायक निदेशक, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, धनबाद, एवं भुवन भास्कर, सहायक निदेशक हस्तशिल्प द्वारा दीप प्रज्वलित कर संयुक्त रूप से किया गया। अतिथियों ने आयोजित कार्यक्रम को सराहनीय कदम बताया और कहा कि सिंदरी जैसे छोटे शहर में शिल्प के जीवंत प्रदर्शनी से झारखंड के हस्तशिल्पियों को बढ़ावा मिलेगा और लोगों में झारखंड की संस्कृति के प्रति रूझान बढ़ेगा।





अतिथियों ने कार्यक्रम में झारखंड और पश्चिम बंगाल से आए हुए सभी हस्तशिल्पियों के स्टॉल का निरीक्षण किया और शिल्प निर्माण की बारीकियों को समझा। सहायक निदेशक भुवन भास्कर ने विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दिया और एवं स्वरोजगार अपनाने को प्रेरित किया।





कार्यक्रम का संचालन विकास कुमार, प्रशिक्षण अधिकारी ने किया। मौके पर रवि कुमार, प्रशिक्षण अधिकारी, टिंकरहाट फाउंडेशन के फाउंडर कुणाल सहित सैकड़ों छात्र-छात्रा एवं शिक्षकगण मौजूद थे।