देश की आजादी के बाद भी सड़क नहीं पहुंची राथाखाड़ गांव,प्रखण्ड मुख्यालय से दो किमी दूर है राथाखाड़





सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने में होती है:ग्रामीण





प्रतिनिधि,मनिका,लातेहार।सबका साथ,सबका विकास का सरकार और प्रशासन भले ही लाख दावे कर ले, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। मनिका प्रखंड के सिंजो पंचायत के (बांड़ी) राथाखाड़ टोला मे निवास कर रही अनूसूचित जाति परिवार तक देश की आजादी के बाद भी विकास की मशाल नहीं पहुंच पाई है। केंद्र सरकार यह दावा करते हुए नहीं थकती कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत देश के हर ग्राम तक पहुंच पथ बना दिया गया है, या बनाने का कार्य भी जारी है, लेकिन राथाखाड़ टोला तक जाने के लिए पक्की सड़क नहीं है।





मनिका प्रखण्ड मुख्यालय से दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है (बांड़ी) राथाखाड़ टोला। सड़क नहीं होने से समस्या है, लेकिन कोई हमें देखने या सुनने नहीं आता है। पंचायत के मुखिया से लेकर जिला के अधिकारी भी हमारी समस्या से अवगत हैं।ग्रामीण नरेश कुमार ने बताया कि सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने में होती है, क्योंकि पक्की और सीधी सड़क नहीं होने के कारण कोई भी छोटा वाहन भी गांव में नहीं आता है, जिसमें काफी परेशानी होती है। इस दौरान नरेश कुमार, विजय कुमार, फूलचंद भुइयां, संजय भुइयां, कमली देवी, मीना देवी, कविता देवी, कमेश भुइयां, देवराज भुइयां, सावित्री देवी, नागेंद्र राम, जगमनिया कुंवर समेत कई ग्रामीण उपस्थित थे।