पश्चिम बंगाल की हाई-प्रोफाइल नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने वाले आगामी उपचुनाव से ठीक पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC/MAITC) ने नंदीग्राम से भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रत्याशी हसिरानी रथ के नामांकन पत्र पर गंभीर सवाल उठाते हुए उनका नामांकन रद्द करने की मांग की है। तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा प्रत्याशी ने चुनाव आयोग को दिए अपने हलफनामे में उम्र और शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी गलत और विरोधाभासी जानकारियां जमा की हैं।
TMC का दावा: हलफनामे में विसंगतियाँ और स्कूल की मान्यता पर सवाल
तृणमूल कांग्रेस के सोशल मीडिया विंग (X/ट्विटर) ने भाजपा प्रत्याशी हसिरानी रथ के हलफनामे की तस्वीरें साझा करते हुए मुख्य रूप से दो प्रमुख मुद्दों को उठाया है:
- उम्र और परीक्षा वर्ष में विरोधाभास: हलफनामे के अनुसार, हसिरानी रथ की उम्र 60 वर्ष से अधिक बताई गई है और उन्होंने वर्ष 1965 में 10वीं कक्षा (मैट्रिक) की परीक्षा पास करने का उल्लेख किया है।
- स्कूल की मान्यता पर सवाल: TMC का दावा है कि प्रत्याशी ने हलफनामे में जिस स्कूल से 10वीं पास करने की जानकारी दी है, उस स्कूल को बोर्ड से 10वीं की परीक्षा आयोजित करने की आधिकारिक मंजूरी ही साल 1973 में मिली थी।
TMC का तर्क: जब संबंधित विद्यालय को 1973 से पहले 10वीं की परीक्षा आयोजित कराने का अधिकार ही प्राप्त नहीं था, तो प्रत्याशी ने 1965 में वहां से परीक्षा कैसे पास की? पार्टी का कहना है कि यह चुनावी हलफनामे में झूठी जानकारी देने का मामला है और इसके आधार पर चुनाव आयोग को उनका नामांकन तुरंत खारिज कर देना चाहिए।
तृणमूल के दावों पर भाजपा और निर्वाचन अधिकारी की प्रतिक्रिया
तृणमूल कांग्रेस के इन आरोपों के बाद भारतीय जनता पार्टी ने पलटवार करते हुए मामले को प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत देखने की बात कही है।
- भाजपा नेता शिशिर बाजोरिया का बयान: भाजपा के वरिष्ठ नेता शिशिर बाजोरिया ने न्यूज़ एजेंसी ANI से बातचीत करते हुए कहा कि हलफनामे या नामांकन से जुड़ी किसी भी प्रकार की आपत्ति का निपटारा करना चुनाव आयोग का काम है। यदि किसी दल को कोई शिकायत है, तो उसे सीधे चुनाव आयोग के समक्ष रखना चाहिए और जो भी निर्णय होगा, वह चुनाव आयोग ही तय करेगा।
- निर्वाचन अधिकारी का रुख: वहीं, पूरे मामले पर संबंधित प्रशासनिक अधिकारी का कहना है कि इस विषय में फिलहाल उन्हें कोई आधिकारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है और न ही ऐसी किसी गड़बड़ी की औपचारिक जानकारी उनके पास है।
चुनावी समीकरण पर असर
नंदीग्राम का यह उपचुनाव राजनीतिक दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। हलफनामे को लेकर शुरू हुआ यह विवाद आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, जहाँ एक तरफ TMC इसे भाजपा के खिलाफ कानूनी और नैतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है, वहीं दूसरी तरफ भाजपा इसे चुनावी प्रक्रिया के तहत हल होने वाला विषय बता रही है। अब सभी की निगाहें चुनाव आयोग के अगले कदम पर टिकी हैं।





