प्रतिनिधि,गोला।सुहाग और संतान के अच्छे स्वास्थ्य के लिए सूर्य उपासना का महापर्व छठ पूजा शुक्रवार से शुरू हो गया। नहाय खाय के साथ चार दिवसीय पर्व की शुरुआत हुई। नहाय खाय की रस्म के साथ श्रद्धालु पहले दिन पर्व की शुरुआत किया। इसके पीछे धार्मिक मान्यता है।पुजारी भास्कर मिश्र के अनुसार सनातन धर्म में प्रकृति की आराधना करना सिखाया गया है। नैतिकता के आधार पर ये संदेश भी है कि सनातन अनुयायी अच्छे के साथ बुरे वक्त का भी साथी होता है।पर्व को मनोभाव के साथ मनाने के लिए श्रद्धालु घरों एवं मंदिर में देर शाम तक तैयारियों में जुटे रहे।
मान्यता के अनुसार पहले दिन सात्विक भोजन का सेवन शुद्धीकरण के लिए किया जाता है। शनिवार को खरना की परंपरा होगी। इस दौरान महिलाएं दिन में व्रत रखकर शाम को रोटी और गुड़ की खीर खाकर व्रत खोलेंगी। रविवार को पूरे दिन और रात महिलाएं निर्जला व्रत रखेंगी और सोमवार की सुबह सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलेंगी।
मान्यता के अनुसार इस पर्व में महिलाएं जमीन पर ही सोती हैं और हर रोज प्रयोग में लिए जाने बर्तनों के बजाए छठ पर्व में अलग बर्तनों में खाना-पानी करती हैं। इसके लिए गुरुवार को बाजार में खरीदारी चलती रही। 17 नवंबर- नहाय खाय से छठ पूजा की शुरुआत 18 नवंबर- खरना 19 नवंबर- छठ पूजा, डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य 20 नवंबर- उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ व्रत का समापन होगा।





