प्रतिनिधि,पाकुड़। एक ओर राज्य और केंद्र सरकार बाल मजदूरी को रोकने के लिए कई तरह की योजनाएं चला रही है, लेकिन पाकुड़ जिले में ये मामला रुकने का नाम ही नही ले रही है। सरकार बच्चों के विकास और शिक्षा को लेकर अडिग है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। वैसे तो छोटे बच्चों को मजदूरी करते जिले भर में आसानी से दिखने को मिल जाता है।चाहे ईंट भट्ठा हो, या होटल,मजदूरी, टोटो चालक सहित अन्य कई जगहों पर, लेकिन मामला मंगलवार को सुबह डीसी कार्यालय के महज सौ मीटर की दूरी का है,जहां सड़क पर साइकिल के सहारे अवैध कोयला ले जाते दिखा।बच्चों की उम्र महज 10 से 12 वर्ष होगी। पूछने पर बच्चों ने अपना घर मुफ्फसिल थाना क्षेत्र बताया और कोयले की कीमत 300 रुपए बताया,जिसे बंगाल में बेचने के लिए ले जाया जा रहा था। स्कूल के बारे में और कौन करवा रहा है, पूछने पर नहीं बताया और चलते बना। सवाल आखिर फिर वही आखिर सरकार का शिक्षा अभियान, सीटी बजाओ और स्कूल चलो, मिड डे मिल अभियान सहित अन्य कई महत्वपूर्ण योजनाएं सिर्फ दिखावे का रह गया। श्रम विभाग के पास पर्याप्त संसाधन रहने के वावजूद ये हाल मतलब पूर्ण रूप से लापरवाही या लाचारी। मामला जो भी हो जरूरत है ऐसे बाल मजदूरी पर सक्ति से लगाम कसने की।





