काठमांडू: नेपाल में प्रकृति का एक बार फिर भयंकर रूप देखने को मिला है। गोरखा जिले की बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण क्षेत्र में 3 महत्वपूर्ण पुल बह गए हैं, कई घरों में पानी घुस गया है और दर्जनों मकानों पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

नेपाल पुलिस और आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, चुमनुब्री-6 के लोकपा और चुमलिंग के बीच पहाड़ दरकने से भारी मात्रा में मिट्टी और मलबा नदी में गिर गया, जिससे नदी का रास्ता अस्थायी रूप से अवरुद्ध हो गया था। इसके बाद अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई:

  • पुलों का बहना: चुमनुब्री-3 में न्याकचेत और सिर्दिबास को जोड़ने वाला पुराना सस्पेंशन ब्रिज, धार्चे-5 में माछाखोला और केरौजा को जोड़ने वाला पुल, तथा आरुघाट के वार्ड 2-3 को जोड़ने वाला सोती का लोहे का पुल पूरी तरह बह गया है।
  • आवासों को नुकसान: माछाखोला की निचली बस्ती में 5 से 7 घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है, जबकि धार्चे-3 के सल्लेरी में 20 से 22 मकानों पर अभी भी भारी खतरा बना हुआ है। कई जगहों पर सड़कें भी टूट चुकी हैं।

प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए त्रिशूली दोभान तक नदी के किनारे न जाने और सुरक्षित तथा ऊंची जगहों पर शरण लेने की कड़ी चेतावनी जारी की है। राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित क्षेत्रों में मुस्तैद हैं।

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अगस्त की आपदा और हिमालयी संकट की पृष्ठभूमि

बता दें कि नेपाल में प्राकृतिक आपदाओं का सिलसिला लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। बीते 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ के कारण 1,400 से अधिक लोगों की जान चली गई थी और 6,000 से ज्यादा लोग लापता हो गए थे। उस आपदा से देश को लगभग 1.66 अरब अमेरिकी डॉलर का सीधा आर्थिक नुकसान हुआ था, जिसमें 83% हिस्सा बुनियादी ढांचे (बुनियादी ढांचे) की बर्बादी से जुड़ा था। इस दौरान कई पनबिजली परियोजनाएं और राजमार्ग भी तबाह हो गए थे।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने हिमालयी क्षेत्रों पर बढ़ते जलवायु संकट का मुद्दा उठाते हुए कहा था कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण पहाड़ों की जमी हुई बर्फ और चट्टानें तेजी से पिघल रही हैं, जिससे भूस्खलन और बाढ़ का खतरा लगातार खतरनाक स्तर पर पहुंच रहा है। उन्होंने इस संकट से निपटने के लिए भारत और चीन द्वारा दिए गए सहयोग के लिए आभार भी व्यक्त किया था।

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