चंडीगढ़/संगरूर: पंजाब में धान की कटाई अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर चुकी है, लेकिन इसके साथ ही पराली जलाने (Stubble Burning) की घटनाओं में आए भारी उछाल ने राज्य की आबो-हवा को बेहद जहरीला बना दिया है। किसान सब्जियों और गेहूं की आगामी फसलों के लिए खेतों को जल्द से जल्द तैयार करने की होड़ में पराली के अवशेषों को आग के हवाले कर रहे हैं। पिछले महज चार दिनों के भीतर राज्य में पराली जलाने के 1,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं, जिससे पंजाब के प्रमुख शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है।
जमीन पर खौफनाक मंजर: नेशनल हाईवे पर छाने लगा खतरनाक स्मॉग
पंजाब के संगरूर सहित विभिन्न जिलों से आई तस्वीरों में सुबह के वक्त चारों तरफ जहरीले और गाढ़े स्मॉग (धुंध व धुएं का मिश्रण) की मोटी चादर फैली दिखाई दे रही है।
- दृश्यता हुई शून्य: धुएं के प्रभाव से नेशनल हाईवे और मुख्य सड़कें ठीक से दिखाई नहीं दे रही हैं, जिससे वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
- सूरज भी धुएं में ओझल: दिन के समय भी आसमान में सूरज धुएं के गुबार में लिपटा नजर आ रहा है।
- कार्रवाई से बचने की नई तरकीब: सड़कों के किनारे खेतों में जली हुई पराली के अवशेष साफ देखे जा सकते हैं। स्थानीय प्रशासन और पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए किसान अचानक खेतों में आग लगाते हैं और तुरंत ट्रैक्टर चलाकर खेत जोत देते हैं ताकि साक्ष्य मिटाए जा सकें।
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एक दिन में रिकॉर्ड 584 मामले, कुल आंकड़ा 2,196 के पार
पंजाब में 15 सितंबर से शुरू हुए सीजन के बाद से अब तक आधिकारिक तौर पर पराली जलाने का कुल आंकड़ा 2,196 तक पहुंच चुका है।
- 3 नवंबर को रिकॉर्ड उछाल: अकेले 3 नवंबर को ही राज्य में एक ही दिन के भीतर पराली जलाने के रिकॉर्ड 584 नए मामले सामने आए।
- शहरों में सांस लेना हुआ दूभर: धुएं के कारण औद्योगिक शहर खन्ना में AQI 293 के पार पहुंच चुका है। वहीं लुधियाना और अमृतसर जैसे बड़े शहरों में औसतन AQI 200 से 250 के बीच 'खराब और बेहद चिंताजनक' श्रेणी में बना हुआ है।
- मौसम का असर: मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि उत्तर-पश्चिमी हवाओं की रफ्तार धीमी होने के कारण पराली का गाढ़ा धुंआ वायुमंडल में ही जम गया है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।
प्रशासनिक कार्रवाई: ₹29 लाख से ज्यादा का जुर्माना और दर्जनों FIR
पराली जलाने की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए राज्य प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लगातार सख्ती बरत रहा है:
- नियमों का उल्लंघन करने वाले 573 से अधिक मामलों में अब तक 29 लाख रुपये से ज्यादा का पर्यावरण मुआवजा (जुर्माना) लगाया जा चुका है।
- इसके अलावा, नियमों की धज्जियां उड़ाने पर 423 से अधिक आधिकारिक FIR दर्ज की जा चुकी हैं।
इसके बावजूद, खेतों से उठता धुआं यह स्पष्ट दर्शा रहा है कि जमीनी स्तर पर प्रशासनिक सख्ती का असर सीमित ही साबित हो रहा है।
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