नई दिल्ली। देश में पशुपालन से जुड़े करोड़ों किसानों की आर्थिक सुरक्षा और पशुधन के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार द्वारा चलाया जा रहा राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP) बेहद कारगर साबित हो रहा है। बड़े पैमाने पर चलाए जा रहे टीकाकरण और निगरानी अभियानों के चलते पशुओं में मुंहपका-खुरपका रोग (FMD) और ब्रुसेलोसिस जैसी गंभीर बीमारियों के मामलों में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है।

टीकाकरण अभियान के प्रमुख आंकड़े और उपलब्धियां

सितंबर 2019 में शुरू किए गए इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक हासिल की गई मुख्य उपलब्धियां इस प्रकार हैं:

  • वैक्सीनेशन कवरेज: देशभर में अब तक FMD वैक्सीन की 147.16 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी हैं।
  • लाभार्थी किसान: इस राष्ट्रव्यापी अभियान का सीधा लाभ लगभग 8.04 करोड़ किसानों और उनके पशुधन को मिला है।
  • FMD के मामलों में कमी: वर्ष 2019 में देशभर में FMD के 132 मामले (प्रकोप) दर्ज किए गए थे, जो वर्ष 2025 तक घटकर मात्र 40 रह गए हैं।
  • ब्रुसेलोसिस पर नियंत्रण: ब्रुसेलोसिस के मामले भी 2019 के 22 से घटकर 2025 में 15 पर आ गए हैं।
  • Asia-1 सीरोटाइप पर सफलता: पशु स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ी सफलता यह रही है कि पिछले तीन वर्षों से देश में FMD के Asia-1 सीरोटाइप का एक भी प्रकोप सामने नहीं आया है।

डिजिटल ट्रैकिंग और रोकथाम पर जोर

정부 (सरकार) का मुख्य उद्देश्य केवल बीमारी का इलाज करना नहीं, बल्कि समय रहते टीकाकरण और नियमित निगरानी के जरिए इसे फैलने से रोकना है।

  1. डिजिटल रिकॉर्डिंग: पशुओं की पहचान (टैगिंग) के साथ-साथ टीकाकरण का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है।
  2. प्रतिरक्षा जांच: टीकाकरण के बाद नियमित जांच में पशुओं के भीतर विभिन्न सीरोटाइप्स के खिलाफ मजबूत इम्यूनिटी (प्रतिरक्षा) देखी गई है।

सुरक्षित पशुधन, सुरक्षित किसान आय

ग्रामीण भारत में विशेषकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए पशुपालन आजीविका का मुख्य आधार है। पशुओं के अस्वस्थ होने से न केवल दूध उत्पादन घटता है, बल्कि किसानों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ता है। FMD और ब्रुसेलोसिस जैसी संक्रामक बीमारियों पर नियंत्रण से दूध उत्पादन स्थिर बना हुआ है और किसानों की आय को सुरक्षा कवच मिला है। आने वाले वर्षों में भी इस डिजिटल निगरानी और समय पर टीकाकरण मॉडल को और अधिक मजबूत किया जाएगा।