पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच ईरान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के सत्र के दौरान अमेरिका के सामने युद्धविराम और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए एक 7-दिवसीय फॉर्मूला पेश किया है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और संकेत दिए हैं कि वे नवंबर में होने वाले मध्यावधि (Midterm) चुनावों के बाद ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई फिर से तेज कर सकते हैं।

ईरान का 7-दिवसीय प्रस्ताव और शर्तें

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मध्यस्थों (विशेष रूप से कतर) के जरिए अमेरिका तक यह प्रस्ताव पहुंचाया। प्रस्ताव के तहत यदि अमेरिका शर्तें स्वीकार करता है, तो स्वीकृति के अगले दिन से 7 दिनों की समयसीमा लागू होगी और सातवें दिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को समुद्री यातायात के लिए खोल दिया जाएगा।

ईरान की मुख्य शर्तें:

  1. नौसैनिक नाकेबंदी की समाप्ति: ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना द्वारा लगाई गई नाकेबंदी तुरंत हटाई जाए।
  2. तेल प्रतिबंधों में छूट: ईरानी कच्चे तेल की बिक्री और निर्यात पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में राहत दी जाए।
  3. संपत्ति की रिहाई: विदेशों में फ्रीज (अवरुद्ध) किए गए लगभग 12 अरब डॉलर के ईरानी खातों को जारी किया जाए।
  4. व्यापक युद्धविराम: लेबनान को शामिल करते हुए 7 दिनों का युद्धविराम लागू हो।
  5. परमाणु वार्ता की बहाली: इन शर्तों के पूरा होने के बाद ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका के साथ फिर से बातचीत शुरू करेगा।

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जून समझौते से समानता और मतभेद

ईरान का यह नया फॉर्मूला जून 2026 में अमेरिका और ईरान के बीच हुए द्विपक्षीय समझौते (MoU) से काफी मिलता-जुलता है, जिसमें 60 दिनों के युद्धविराम की बात कही गई थी। हालांकि, जुलाई में दोनों पक्षों के बीच अविश्वास बढ़ने से वह समझौता टूट गया था। इस बार ईरान ने प्रक्रिया को अधिक तीव्र बनाते हुए 7 दिन की समयसीमा तय की है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का वैश्विक और सामरिक महत्व

'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला एक संकरा समुद्री मार्ग है।

  • ऊर्जा आपूर्ति का केंद्र: वैश्विक युद्ध से पहले दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग 20% (पांचवां हिस्सा) इसी मार्ग से होकर गुजरता था।
  • दबाव की रणनीति: जलमार्ग में जहाजों की आवाजाही बाधित होने से वैश्विक तेल बाजार प्रभावित होता है, जिसे ईरान अमेरिका पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव बनाने के लिए प्रमुख हथियार के रूप में देख रहा है।

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ट्रम्प प्रशासन का रुख और चुनावी समीकरण

द वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस प्रस्ताव पर संदेह जताते हुए इसे खारिज कर दिया है। ट्रम्प का मानना है कि अमेरिका इस जलक्षेत्र में मजबूत स्थिति में है और ईरान आर्थिक दबाव के कारण वार्ता के लिए मजबूर हो रहा है।

  • अमेरिकी मध्यावधि चुनाव (Nov 2026): अमेरिका में नवंबर में मध्यावधि चुनाव होने हैं। जानकारों (जैसे क्विंसी इंस्टीट्यूट के त्रिता पारसी) के अनुसार, ईरान को लगता था कि ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने और युद्ध रोकने के लिए ट्रम्प चुनाव से पहले समझौता कर सकते हैं।
  • भावी रणनीति: ट्रम्प ने सहयोगियों से कहा है कि वे चुनावों के बाद ईरान पर सैन्य हमले और मजबूत आर्थिक प्रतिबंधों की रणनीति को प्राथमिकता देंगे।

क्षेत्रीय सहयोगियों और सऊदी अरब की आशंकाएं

सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देश इस प्रस्ताव को लेकर सतर्क हैं। यमन में हूती गतिविधियों और क्षेत्रीय तेल अवसंरचना पर हुए हमलों के बाद खाड़ी देशों की चिंताएं बढ़ी हैं। यमन के संघर्ष को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट न होने के कारण क्षेत्रीय स्थिरता पर सवाल बने हुए हैं।

कतर और अन्य अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रास्ते खुले रखने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन ट्रम्प के सख्त रुख से निकट भविष्य में संकट सुलझने के आसार बेहद कम दिखाई दे रहे हैं।