प्रतिनिधि,जमशेदपुर।दो दिनों पूर्व चिकित्सा कर्मियों ने नियमितीकरण की मांग को लेकर कदमा बाजार स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता के आवास का घेराव किया था और अब सहियाओं ने नियमितीकरण की मांग को लेकर हड़ताल कर दिया है। जिसके तहत मंगलवार कदमा सोनारी समेत अन्य क्षेत्रों की सहियाओं ने झारखंड प्रदेश स्वास्थ्य सहिया संघ के बैनर तले प्रदर्शन किया।





इस दौरान संहिताओं के द्वारा कदमा मेन रोड स्थित रंकिनी मंदिर से रैली निकाली गई। जो कदमा बाजार स्थित मंत्री आवास और कार्यालय होते हुए रामजनम नगर स्थित फुटबॉल मैदान पहुंची। जहां सहियाओं ने एकत्रित होकर जोरदार प्रदर्शन भी किया। प्रदर्शन के दौरान संहियाओं ने 2000 में दम नहीं 18000 से कम नहीं, मुख्यमंत्री मुर्दाबाद और स्वास्थ्य मंत्री मुर्दाबाद के नारे भी लगाए।





मौके पर सहिया आशा कुमारी ने कहा कि पूरे महीने काम के बदले उन्हें 2000 रुपए का प्रोत्साहन राशि दिया जाता है। जिससे घर चलाना काफी मुश्किल है। पूरे राज्य में 42000 सहिया मानदेय पर काम कर रही है। जिन्हें प्रोत्साहन राशि के तौर पर सिर्फ 2000 रुपए ही दिया जाता है। जबकि उन्हें स्वास्थ्य कर्मी का दर्जा कभी मिला ही नहीं है। 1 माह से 9 माह की गर्भवती महिला के लिए उन्हें सिर्फ 200 रुपए ही दिया जाता है। साथ ही गर्भवती महिला के 4 एनसी जांच के 4 महीना बाद उन्हें 200 रुपए मिलता है। जबकि बच्चे के प्रसव के बाद एमआर के टीका के समय उन्हें 100 रुपए मिलता है। इसी तरह टीवी के मरीजों की भी 6-6 महीने देखभाल हमें करनी पड़ती है। हमें टुकड़ों में पैसा दिया जाता है। जिसके लिए हमें आठ रजिस्टर मेंटेन करना पड़ता है और अगर मेंटेन ना किया तो उसमें से भी राशि काट दी जाती है। आठ रजिस्टर मेंटेन करने पर हमें 2000 रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। बड़े-बड़े नेता स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री 2000 रुपए में सिर्फ अपनी चप्पल खरीदते हैं। जबकि हमें 2000 रुपए में अपना जीवन यापन करना पड़ रहा है। सहिया 24 घंटे चिकित्सा सेवा में हमेशा तत्पर रहती है। दिन तो दिन रात में भी हमें गर्भवती महिलाओं के प्रसव के लिए जाना पड़ता है। चाहे कोई भी मौसम हो और स्थिति कैसी भी हो, हमें काम करना पड़ता है। बावजूद इसके हमारी कोई सुनने वाला नहीं है। 2000 रुपए मिलने वाली प्रोत्साहन राशि में ही हमें मोबाइल और आने जाने का खर्च भी उठाना पड़ता है। जिसका राज्य सरकार वह नहीं करती है। 2007 से लगातार हम लोगों की सेवा करते आ रहे हैं। मगर आज तक हमारे बारे में किसी ने भी नहीं सोचा। सिर्फ हमें आश्वासन ही मिला है। जबकि सहियाओं ने 18000 रुपए वेतन, नियमितीकरण, पीएफ, वेतन बढ़ोतरी के साथ साथ स्वास्थ्य कर्मी का दर्जा समेत अन्य देने की मांग की है। साथ ही सभी ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होती तब तक वे काम पर वापस नहीं लौटेंगी। बताते चलें कि स्वास्थ्य कर्मी और सहिया के हड़ताल पर चले जाने से राज्य की चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई है।