कोलकाता:
पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य की कानून-व्यवस्था, सामाजिक सुरक्षा और सांस्कृतिक धरोहर को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए ऐतिहासिक फैसलों का रोडमैप तैयार कर लिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रविवार को घोषणा की कि आगामी छह महीने के भीतर राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू की जाएगी। इसके साथ ही 'लव जिहाद' और 'लैंड जिहाद' जैसी सामाजिक व सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए अत्यंत सख्त कानून अस्तित्व में आएंगे।
বিশ্ব हिन्दू परिषद (VHP) के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल की जन्मशती के पावन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार संविधान की सीमाओं के भीतर रहकर नागरिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं, मंदिरों, मठों और ऐतिहासिक विरासत पर किसी भी तरह का आघात बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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प्रमुख घोषणाएँ और नीतिगत फैसले
- न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई समिति द्वारा समीक्षा: यूसीसी के प्रस्तावित मसौदे का वैज्ञानिक व कानूनी अध्ययन करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति पहले ही गठित की जा चुकी है।
- समान नागरिक कानून: नए कानून के अंतर्गत सभी समुदायों में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे नागरिक मामलों में एक समान कानूनी ढांचा लागू होगा। बंगाल इस मामले में उत्तराखंड और गुजरात के मॉडल का अनुसरण करेगा।
- ₹1,000 करोड़ का धार्मिक पर्यटन सर्किट: राज्य की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक पटल पर उभारने के लिए ₹1,000 करोड़ के बजटीय आवंटन से एक वृहद धार्मिक पर्यटन सर्किट विकसित किया जाएगा। यह महत्त्वाकांक्षी परियोजना दो वर्ष के भीतर पूरी होगी।
- राष्ट्रविरोधी तत्वों पर सख्त रुख: मुख्यमंत्री ने साफ चेतावनी दी कि बंगाल की धरती पर किसी भी प्रकार की राष्ट्रविरोधी या विभाजनकारी गतिविधियों को पनपने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने नागरिकों से सतर्क व एकजुट रहने की अपील की।
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यह कदम 2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के चुनावी संकल्प पत्र में किए गए उस प्रमुख वादे की पूर्ति की दिशा में एक निर्णायक कदम है, जिसमें सरकार गठन के 6 माह के भीतर समान नागरिक संहिता लागू करने की प्रतिबद्धता जताई गई थी।
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