दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक समीकरणों में उस समय नया मोड़ आ गया जब बांग्लादेश ने 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' (Mecca Joint Defence Pact) में शामिल होने की इच्छा जताई। ढाका ने इसे एक अनूठा रक्षा अवसर बताते हुए कहा कि यह "मुस्लिम परिवार का आंतरिक मामला" है और इससे अन्य साझेदार देशों के साथ उसके संबंध प्रभावित नहीं होंगे।
बांग्लादेश का रुख और दिए गए बयान:
- 'मुस्लिम परिवार का आंतरिक मामला': बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने संसद में कहा था कि यदि औपचारिक निमंत्रण मिलता है, तो देश इस समझौते से जुड़ने पर सकारात्मक विचार करेगा। उन्होंने इसे मुस्लिम देशों का निजी मामला करार दिया।
- रणनीतिक अवसर की तलाश: बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा कि यह पैक्ट ढाका के लिए नए रणनीतिक द्वार खोल सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी एक रक्षा समझौते में शामिल होने का मतलब दूसरों से दूरी बनाना नहीं है। हालांकि, बांग्लादेश को अभी तक इस समझौते के लिए आधिकारिक निमंत्रण नहीं मिला है।
क्या है मक्का डिफेंस पैक्ट ('इस्लामिक नाटो')?
- स्थापना व सदस्य: 7 अगस्त 2026 को सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये ने इस ऐतिहासिक सैन्य समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
- सामूहिक सुरक्षा सिद्धांत: इस पैक्ट के तहत किसी भी एक सदस्य देश पर हुआ हमला, तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इसके अतिरिक्त तीनों देश आपस में रक्षा प्रौद्योगिकी और खुफिया जानकारियां भी साझा करेंगे।
- सामरिक महत्व: एक्सपर्ट्स इसे पश्चिम एशिया में अमेरिकी प्रभाव घटने के बाद 'इस्लामिक नाटो' की तर्ज पर उभरे नए क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन के रूप में देख रहे हैं।
भारत की प्रतिक्रिया और कूटनीतिक चिंताएं:
- सुरक्षा पर अलर्ट मोड: भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत इस पूरे घटनाक्रम और सुरक्षा परिदृश्य पर बारीक नजर रख रहा है तथा अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है।
- गुटनिरपेक्षता से भटकाव: कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, बांग्लादेश का इस समझौते की ओर झुकाव उसकी लंबे समय से चली आ रही संतुलित और तटस्थ विदेश नीति के विपरीत है।
- दोहरे मोर्चे की चुनौती: यदि बांग्लादेश इस समझौते का हिस्सा बनता है, तो पाकिस्तान और बांग्लादेश दोनों ओर से भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं और रणनीतिक चिंता में बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, खाड़ी देशों के साथ भारत के मजबूत रणनीतिक संबंधों के कारण स्थिति नियंत्रण में मानी जा रही है।





