पटना के कर्पूरी सभागार में आयोजित जद(यू) विधानमंडल दल के एक दिवसीय ओरिएंटेशन प्रोग्राम ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। एक तरफ जहाँ PRS लेजिस्लेटिव रिसर्च के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विधायकों को विधायी प्रक्रियाओं में अधिक प्रभावी बनाना था, वहीं दूसरी ओर बैठक के भीतर उभरे मुद्दों और नेताओं की अनुपस्थिति ने बिहार के सियासी गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

मंच पर पिता-पुत्र की जुगलबंदी

इस कार्यक्रम का सबसे प्रमुख आकर्षण पूर्व मुख्यमंत्री व पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार और उनके पुत्र स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का एक साथ मंच पर दिखना रहा। अप्रैल में नीतीश कुमार द्वारा मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद बने नए सियासी समीकरणों के बीच दोनों नेता पहली बार सार्वजनिक रूप से इस तरह एक साथ दिखे।

  • दीप प्रज्वलन: कार्यक्रम के उद्घाटन के दौरान 44 वर्षीय निशांत अपने पिता के साथ दीप प्रज्वलित करते नजर आए।
  • कार्यकर्ताओं का उत्साह: कर्पूरी सभागार में उपस्थित नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पिता-पुत्र की इस जोड़ी के समर्थन में जमकर नारेबाजी की।

बैठक के भीतर उपजे प्रमुख सियासी मुद्दे

ओरिएंटेशन प्रोग्राम के समानांतर बैठक के अंदरूनी घटनाक्रमों ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया:

  • निशांत को मुख्यमंत्री बनाने की मांग: बैठक में कुछ विधायकों ने निशांत कुमार को भविष्य का मुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव खुलकर रखा।
  • UCC का विरोध: यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के मुद्दे पर भी चर्चा हुई, जहाँ कई विधायकों ने बिहार में इसे लागू न होने देने की बात कही।
  • पार्टी के नाम में बदलाव: एक विधायक द्वारा JDU का नाम बदलकर उसमें नीतीश कुमार का नाम जोड़ने का सुझाव दिया गया, जिस पर यह तय हुआ कि इस विषय पर राष्ट्रीय परिषद की आगामी बैठक में चर्चा की जाएगी।

दिग्गजों की गैरहाजिरी और बढ़ता अंदरूनी तनाव

बैठक के दौरान संगठन के भीतर की खींचतान भी स्पष्ट रूप से सामने आई:

नेता / विधायकस्थितिउत्पन्न विवाद / घटनाक्रम
ललन सिंहअनुपस्थितकेंद्रीय मंत्री की गैरहाजिरी पर कई विधायकों ने सवाल उठाए।
अनंत सिंहअनुपस्थितएमएलसी चुनाव को लेकर नीरज कुमार से जारी विवाद के बीच बैठक से दूरी बनाई; नीरज कुमार को हराने का खुला बयान दिया।
नीरज कुमारउपस्थितनाम लिए बिना अनंत सिंह पर पलटवार किया, जिससे गुटबाजी उजागर हुई।

इस कार्यक्रम में पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा, प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और मंत्री श्रवण कुमार सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। हालांकि, दिग्गज नेताओं की अनुपस्थिति और नीतिगत असहमतियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जद(यू) के भीतर आने वाले दिनों में सियासी घमासान और तेज हो सकता है।