पटना। बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार ने भूमि अधिग्रहण, मुआवजा और पुनर्वास से जुड़े विवादों के जल्द निस्तारण के लिए एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। राज्य के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सभी नौ प्रमंडलीय मुख्यालयों में स्थित भूमि-अर्जन, पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन प्राधिकरणों (LARRA) के लिए नए पीठासीन पदाधिकारियों की नियुक्ति कर दी है। विभाग की ओर से इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है।

त्वरित और समयबद्ध न्याय दिलाना प्राथमिकता: डॉ. दिलीप जायसवाल

राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने बताया कि राज्य के बुनियादी ढांचे के विकास और जनहित की परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण के मामलों में प्रभावित लोगों को पारदर्शी एवं त्वरित न्याय दिलाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

  • 3 वर्ष या 65 वर्ष का कार्यकाल: सभी नियुक्त पीठासीन अधिकारियों का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तिथि से तीन वर्ष या 65 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) तक रहेगा।
  • 7 दिनों में योगदान का निर्देश: जारी अधिसूचना के तहत सभी अधिकारियों को नियुक्ति पत्र जारी होने के सात दिनों के भीतर संबंधित प्रमंडलीय कार्यालय में अपना योगदान देना अनिवार्य किया गया है।
  • सुनवाई और मुआवजे का अधिकार: नए पीठासीन पदाधिकारियों को भूमि अर्जन, पुनर्वास, मुआवजा संबंधी दावों के निस्तारण और कानून के तहत संदर्भित सभी विवादों पर फैसला सुनाने का पूर्ण अधिकार होगा।

प्रमंडलवार नियुक्त पीठासीन पदाधिकारियों की सूची

राज्य के सभी 9 प्रमंडलों में नियुक्त सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीशों व न्यायिक अधिकारियों का विवरण निम्नलिखित है:

पटनाहेमंत कुमार त्रिपाठीप्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश
मुजफ्फरपुरअली अहमदसेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश
भागलपुरविजय आनंद तिवारीसेवानिवृत्त प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश
गयाविनोद कुमार तिवारीप्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश
दरभंगादेवराज त्रिपाठीसेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश
सारणसम्पूर्णानंद तिवारीसेवानिवृत्त अध्यक्ष, राज्य परिवहन अपीलीय प्राधिकार
मुंगेरराकेश मालवीयप्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश
पूर्णियाराधे श्याम शुक्लाप्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश
कोसी (सहरसा)हसमुद्दीन अंसारीप्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश

फैसले का संभावित प्रभाव

राज्य में कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (जैसे फोरलेन सड़कें, रेलवे लाइनें और औद्योगिक गलियारे) में भूमि अधिग्रहण एवं मुआवजे को लेकर वर्षों से मामले लंबित पड़े थे। प्राधिकरणों में पीठासीन पदाधिकारियों के पद भरने से न केवल अदालती मुकदमों का बोझ कम होगा, बल्कि प्रभावित किसानों व भू-स्वामियों को समयबद्ध तरीके से उचित मुआवजा और पुनर्वास का लाभ मिल सकेगा।