भारत के खनिज मानचित्र पर बिहार एक नए और रणनीतिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। वर्ष 2021 से 2024 के दौरान हुए भूवैज्ञानिक (जियोलॉजिकल) सर्वेक्षणों में राज्य के चार प्रमुख जिलों—रोहतास, जमुई, गया और जहानाबाद में ₹21,000 करोड़ से अधिक मूल्य के खनिज संसाधनों की पहचान की गई है। इनमें सोना, लिथियम, रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REE) और मैग्नेटाइट जैसे अति-महत्वपूर्ण एवं हाई-टेक खनिजों का विशाल भंडार शामिल है।
'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, यदि इन क्षेत्रों में खनन शुरू होता है, तो राज्य को हर साल ₹5,000 करोड़ से अधिक का राजस्व मिल सकता है, जो इसके वर्तमान रिकॉर्ड खनन संग्रह (₹3,592 करोड़) से कहीं अधिक होगा।
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किस जिले में मिला कौन-सा खनिज?
बिहार में मिले खनिज भंडारों का जिलावार और श्रेणीवार विवरण इस प्रकार है:
1. रोहतास (सबसे बड़ा भंडार)
- ग्लौकोनाइट: पिपराडीह-भुरवा और चुटिया-नौहट्टा ब्लॉक में लगभग 130.11 मिलियन टन (अनुमानित मूल्य ₹14,048 करोड़)। इसका उपयोग पोटाश खाद बनाने में होगा, जिसके लिए भारत अभी आयात पर निर्भर है।
- हाई-ग्रेड लाइमस्टोन: भोरा-कठरा ब्लॉक में 33 से 39.68 मिलियन टन (मूल्य ₹1,761 करोड़), जो सीमेंट उद्योग के लिए अत्यंत उपयोगी है।
- पाइराइट: अमझोर में देश के ज्ञात पाइराइट संसाधनों का लगभग 95% हिस्सा मौजूद है, जो सल्फ्यूरिक एसिड और रसायनों के निर्माण में प्रयुक्त होता है।
2. जमुई (सोना और लोह-अयस्क)
- मैग्नेटाइट: माजोस ब्लॉक में 48.40 मिलियन टन (मूल्य ₹3,817 से ₹6,000 करोड़) और भंटा ब्लॉक में 6.49 मिलियन टन (मूल्य ₹512 करोड़) मैग्नेटाइट मिला है। यह स्टील उद्योग के लिए कच्चा माल है।
- सोना (सोनो क्षेत्र): 222.88 मिलियन टन अयस्क में लगभग 37.6 टन सोने के संसाधन का अनुमान है। वर्ष 2027-28 तक यहाँ से ट्रायल प्रोडक्शन शुरू करने का लक्ष्य है।
3. गया और जहानाबाद (हाई-टेक व रणनीतिक खनिज)
- यहाँ वैनेडियम-युक्त मैग्नेटाइट, इल्मेनाइट, लिथियम-युक्त पेग्मेटाइट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स मिले हैं।
- उपयोग: रेयर अर्थ और लिथियम का उपयोग इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), बैटरी, रक्षा उपकरण, विंड टर्बाइन और इलेक्ट्रॉनिक्स में होता है। वैनेडियम का उपयोग मजबूत स्टील एवं एनर्जी स्टोरेज में किया जाता है।
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राह की मुख्य चुनौतियाँ: खजाने को निकालना आसान नहीं
जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) द्वारा खनिजों की पहचान (G4 से G1 स्टेज) करना पहला कदम है। इन संसाधनों को व्यावसायिक उपयोग में लाने के लिए राज्य के सामने कई बड़ी रुकावटें हैं:
- निवेशकों की कम रुचि और बोली रद्द होना: शुरुआती नीलामी में डेटा की कमी के कारण ग्लौकोनाइट और निकेल के कुछ ब्लॉकों के लिए पर्याप्त बोलियाँ नहीं मिलीं। कंपनियों को भारी निवेश से पहले व्यावसायिक व्यवहार्यता (Commercial Viability) का भरोसा चाहिए।
- लंबी प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं: ड्रिलिंग, पर्यावरण एवं वन मंजूरी (Environment Clearance), भूमि अधिग्रहण और लीज प्रक्रियाओं में काफी समय लगता है। राज्य सरकार ने 2026 से 2031 के बीच विभिन्न प्रोजेक्ट्स से खनन शुरू करने की योजना बनाई है।
- अवैध खनन का खतरा: बड़े पैमाने पर खनिजों की मौजूदगी से अवैध खनन की आशंका बढ़ जाती है। इससे निपटने के लिए बिहार सरकार 1,000 सदस्यों वाली समर्पित 'माइंस पुलिस फोर्स' के गठन की तैयारी कर रही है।
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