नई दिल्ली/थिम्पू।

भारत और भूटान के द्विपक्षीय संबंधों ने एक नया मुकाम हासिल किया है। दोनों पड़ोसी देशों ने अपनी दोस्ती को अगले स्तर पर ले जाते हुए विकास, ऊर्जा, कनेक्टिविटी, डिजिटल भुगतान और शिक्षा जैसे अहम क्षेत्रों में कई दूरगामी समझौतों पर मुहर लगाई है। यह रणनीतिक खाका न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देगा, बल्कि आम नागरिकों के जीवन को भी सुगम बनाएगा।

ऊर्जा क्षेत्र में ₹4,000 करोड़ का बड़ा निवेश

ऊर्जा क्षेत्र में भूटान की क्षमता को बढ़ाने के लिए भारत सरकार ने ₹4,000 करोड़ की कंसेशनल लाइन ऑफ क्रेडिट देने की घोषणा की है:

  • लुनाना हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट: 500 किलोवाट क्षमता वाले इस नए प्रोजेक्ट की नींव रखी गई।
  • मौजूदा परियोजनाएं: पुनात्सांगछू-I और पुनात्सांगछू-II जैसी बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं के काम में तेजी लाने पर सहमति बनी।

सीमा पार रेल नेटवर्क से मजबूत होगी कनेक्टिविटी

व्यापार, निवेश और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों ने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के कदम उठाए हैं:

  • रेल लिंक: गेलिफू-कोकराझार और समत्से-बनारहाट रेल लिंक पर काम तेजी से जारी है।
  • नए चेक पोस्ट: असम के हातिसार में नया इमिग्रेशन चेक पोस्ट तथा समरांग में लैंड कस्टम्स स्टेशन शुरू होने से आवाजाही और व्यापार बेहद आसान हो जाएगा।

डिजिटल इंडिया का विस्तार और शिक्षा को बढ़ावा

भूटानी नागरिक अब भारत में अपने मोबाइल ऐप के जरिए UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) से सीधे डिजिटल भुगतान कर सकेंगे। इससे भारत आने वाले पर्यटकों, मरीजों और छात्रों को कैश रखने की मजबूरी से मुक्ति मिलेगी।

शिक्षा के क्षेत्र में भारत ने बड़ा दिल दिखाते हुए:

  • ICCR स्कॉलरशिप: सीटों की संख्या 30 से बढ़ाकर 60 कर दी गई है।
  • नालंदा यूनिवर्सिटी: भूटानी छात्रों के लिए सीटें 30 से बढ़ाकर 55 कर दी गई हैं।

व्यापारिक छूट और कूटनीतिक सहयोग

भारत ने भूटान को विश्व स्तर पर जारी सप्लाई चेन संकट के बावजूद पेट्रोल, डीजल और LPG की निर्बाध आपूर्ति का भरोसा दिया है, साथ ही भूटान से 17 विशेष लकड़ियों के निर्यात को हरी झंडी दे दी है। इसके बदले, भूटान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में वर्ष 2028-29 के लिए भारत की गैर-स्थायी सदस्यता की दावेदारी का पूर्ण समर्थन जताया है।