नई दिल्ली: देश में भिक्षावृत्ति (भीख मांगने की समस्या) को जड़ से समाप्त करने और इस मार्ग पर जीवन बिताने वाले लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार की SMILE (Support for Marginalized Individuals for Livelihood and Enterprise) योजना एक महत्वपूर्ण और प्रभावी कदम साबित हो रही है। हालांकि, यह सवाल अब भी बना हुआ है कि क्या यह योजना लोगों को स्थायी रूप से भीख छोड़कर रोजगार पाने में पूरी तरह मदद कर पा रही है?

क्या कहते हैं हालिया आंकड़े?

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, इस योजना का मुख्य उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को केवल सड़कों से हटाना नहीं, बल्कि उन्हें आश्रय, चिकित्सा, शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार मुहैया कराना है, ताकि वे सम्मान के साथ जीवन जी सकें। योजना के तहत अब तक देश भर में 45,073 लोगों की पहचान की जा चुकी है, जिनमें से 13,134 लोगों (लगभग 29 प्रतिशत) को पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) सहायता मिल चुकी है।

हालांकि, जानकारों का मानना है कि पहचाने गए लोगों और देश में मौजूद कुल बेघर व भिक्षावृत्ति से जुड़े लोगों की संख्या में अंतर है, इसलिए केवल शुरुआती आंकड़ों के आधार पर यह दावा नहीं किया जा सकता कि समस्या पूरी तरह समाप्त हो गई है।

2011 की जनगणना और राज्यों की स्थिति

भारत में भिक्षावृत्ति से जुड़े लोगों का सबसे व्यापक आधिकारिक आंकड़ा 2011 की जनगणना से मिलता है, जिसके अनुसार देश में कुल 4,13,670 भिखारी और बेघर लोग दर्ज किए गए थे:

  • कुल संख्या: 4,13,670 (जिसमें 2,21,673 पुरुष और 1,91,997 महिलाएं शामिल थीं)
  • प्रमुख राज्य: पश्चिम बंगाल (81,244), उत्तर प्रदेश (65,835), बिहार (29,723), मध्य प्रदेश (28,695), राजस्थान (25,853) और महाराष्ट्र (24,307) में सबसे अधिक संख्या दर्ज की गई थी।

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रिहैबिलिटेशन और स्थायी रोजगार की चुनौतियां

विशेषज्ञों का कहना है कि रिहैबिलिटेशन सहायता मिलने का मतलब हर मामले में तुरंत स्थायी रोजगार मिल जाना या व्यक्ति का हमेशा के लिए भीख मांगना छोड़ देना नहीं होता। स्थायी बदलाव के लिए यह आवश्यक है कि लोग लंबे समय तक रोजगार, सुरक्षित आवास और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े रहें। वर्तमान में यह योजना देश के 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 216 शहरों में लागू है।

सरकार के आगामी लक्ष्य और दिल्ली का प्रदर्शन

सरकार ने आने वाले वर्षों में इस अभियान का दायरा और बढ़ाने का निर्णय लिया है:

  • 2031 तक का लक्ष्य: वित्त वर्ष 2030-31 तक इस योजना के तहत 35,000 और लोगों को शामिल करने और रिहैबिलिटेशन सहायता देने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, योजना का विस्तार 295 शहरों तक करने और 100 शहरों को पूरी तरह भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने की योजना है।
  • दिल्ली में प्रगति: राजधानी दिल्ली में पिछले 18 महीनों में 400 से अधिक लोगों को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा गया है।

अन्य सहायक योजनाएं

भिक्षावृत्ति के खात्मे और गरीबों के उत्थान के लिए सरकार कई अन्य माध्यमों से भी प्रयास कर रही है, जिनमें शामिल हैं:

  1. दीनदयाल अंत्योदय योजना (DAY-NULM): शहरी गरीबों को रोजगार, स्वरोजगार और कौशल प्रशिक्षण देना।
  2. प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY): युवाओं को रोजगारोन्मुख कौशल प्रशिक्षण से जोड़ना।
  3. प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP): नए सूक्ष्म उद्योग और छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता।
  4. राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP): वृद्धों, विधवाओं और दिव्यांगों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्रदान करना।

सरकार का लक्ष्य है कि डिजिटल माध्यमों से निगरानी रखते हुए इन कमजोर वर्गों को आत्मनिर्भर बनाया जाए और उन्हें दूसरों पर निर्भर रहने की मजबूरी से पूरी तरह मुक्त किया जाए।

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