अस्ताना / नई दिल्ली
भारतीय कुश्ती के इतिहास में एक नया और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। कजाकिस्तान की राजधानी अस्ताना में आयोजित वर्ल्ड कुश्ती चैंपियनशिप में 29 वर्षीय भारतीय महिला रेसलर मनीषा भानवाला ने देश के लिए वह कर दिखाया जो आज तक कोई महिला पहलवान नहीं कर पाई थी। मनीषा ने 59 किग्रा भारवर्ग के फाइनल मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया है।
इसके साथ ही वह विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की पहली महिला पहलवान बन गई हैं। महान पहलवान सुशील कुमार के बाद विश्व चैंपियनशिप में देश को स्वर्ण पदक दिलाने वाली मनीषा महज दूसरी भारतीय रेसलर हैं।
0-6 से पिछड़ने के बाद किया रोंगटे खड़े कर देने वाला पलटवार
मनीषा के लिए खिताबी मुकाबला बिल्कुल भी आसान नहीं रहा। अमेरिका की मजबूत पैन अमेरिकन चैंपियन एबिगेल एलिजाबेथ नेटे के खिलाफ फाइनल में एक समय मनीषा 0-6 से पिछड़ रही थीं और मुकाबला हाथ से फिसलता नजर आ रहा था।
पहले पीरियड के अंत तक वह 1-5 से पीछे थीं, लेकिन हरियाणा की इस जांबाज बेटी ने हार नहीं मानी। मैच के आखिरी तीन मिनटों में उन्होंने गजब का मानसिक संयम और शारीरिक कौशल दिखाते हुए जोरदार वापसी की। लगातार अंक बटोरते हुए मनीषा ने अमेरिकी रेसलर को 8-6 से मात दी और पोडियम पर शीर्ष स्थान हासिल कर तिरंगा फहरा दिया।
सेमीफाइनल का सफर: इससे पहले सेमीफाइनल मुकाबले में भी मनीषा ने कजाकिस्तान की अल्तिन शगायेवा को 10-0 से करारी शिकस्त देकर पिनफॉल के जरिए फाइनल का टिकट कटाया था।
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भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन, झोली में आए कई पदक
मनीषा भानवाला के इस ड्रीम गोल्ड मेडल के साथ ही भारत ने वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के इतिहास में अपना अब तक का सबसे शानदार और सर्वश्रेष्ठ पदक अभियान दर्ज किया है। इस चैंपियनशिप में भारतीय महिला पहलवानों ने कुल मिलाकर पदकों की झड़ी लगा दी:
- स्वर्ण पदक (Gold): मनीषा भानवाला (59 किग्रा)
- रजत पदक (Silver): नीलम सिरोही (50 किग्रा) और काजल ढोचक (76 किग्रा)
- कांस्य पदक (Bronze): तनु (72 किग्रा) – जिन्होंने अमेरिका की प्रेसिअस रोजाना बेल को 9-5 से हराया।
लंबे इंतजार के बाद टूटा मिथक
इससे पहले 2021 में अंशु मलिक विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान जरूर बनी थीं, लेकिन वे स्वर्ण पदक जीतने से चूक गई थीं। इस बार अस्ताना में नीलम सिरोही और काजल ढोचक ने भी फाइनल में जगह बनाई थी और दोनों को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। लेकिन मनीषा भानवाला ने अपने तीसरे प्रयास में देश का वर्षों पुराना इंतजार खत्म कर दिया और इतिहास के पन्नों में अपना नाम अमर कर लिया।
मनीषा की इस ऐतिहासिक और संघर्षपूर्ण जीत ने यह साबित कर दिया है कि अदम्य साहस और कभी हार न मानने की जिद से किसी भी मुश्किल हालात को बदला जा सकता है। उनकी इस उपलब्धि से पूरा देश गौरवान्वित है।
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