मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटिल ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए 12 सितंबर तक का अल्टीमेटम जारी किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर मराठा समाज की सभी मांगों का समाधान नहीं निकाला गया, तो मराठा समुदाय बड़ी संख्या में मुंबई का रुख करेगा और इस आंदोलन को एक निर्णायक मोड़ देगा।

गौरतलब है कि 14 सितंबर से महाराष्ट्र में 11 दिवसीय गणेशोत्सव का भव्य आयोजन शुरू हो रहा है। ऐसे में यदि आंदोलनकारी मुंबई की ओर कूच करते हैं, तो त्योहारी सीजन के दौरान राजधानी की कानून-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है।

कुणबी प्रमाण पत्र के ज़रिए ही 'टिकाऊ आरक्षण' संभव

जरांगे पाटिल ने आरक्षण की प्रकृति पर स्पष्टता देते हुए कहा कि कानूनी रूप से मजबूत और स्थायी आरक्षण केवल 'कुणबी' प्रमाण पत्र के माध्यम से ही संभव है। इसके साथ ही उन्होंने निम्नलिखित मुद्दों को पुरजोर तरीके से सुलझाने की मांग की:

  • संबद्ध विषय: SEBC, EWS, 'सारथी' संस्था की योजनाएं और कुणबी जीआर (GR) से जुड़े लंबित मामलों का समाधान।
  • सामाजिक लामबंदी: किसानों, धनगर, दलित, मुस्लिम, ओबीसी, लमानी और कैकाड़ी समाज की समस्याओं को उठाते हुए सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाया।
  • अन्य दलों का समर्थन: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने इस आंदोलन को जायज बताते हुए अपना पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की है।

शांतिपूर्ण घेराबंदी और मुंबईकरों से अपील

जरांगे पाटिल ने 29 अगस्त से 12 सितंबर तक प्रतिदिन सुबह-शाम आंदोलन स्थल पर उपस्थित रहने की बात कही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से साफ कहा कि उनके नेतृत्व में किसी भी प्रकार की हिंसा, आगजनी या पत्थरबाजी नहीं होनी चाहिए।

  • मुंबई घेराबंदी की रणनीति: 12 सितंबर तक मांगें न पूरी होने पर दोपहिया वाहनों (मोटरसाइकिलों) के साथ मुंबई को चारों तरफ से घेरने की योजना है।
  • स्थानीय समर्थन की मांग: उन्होंने मुंबई में रहने वाले मराठा समाज से बाहर से आने वाले आंदोलनकारियों के लिए भोजन और रुकने की व्यवस्था सुनिश्चित करने का आह्वान किया है।

सरकार के पास अब इन मांगों पर विचार करने के लिए केवल 15 दिनों का समय शेष है। यदि 12 सितंबर तक कोई ठोस समाधान नहीं निकलता है, तो मराठा आंदोलन मुंबई में एक व्यापक और निर्णायक रूप ले सकता है।