प्रतिनिधि,साहिबगंज।किसी मशहूर फिल्म का एक बहुत बेहतरीन डायलॉग है,जिसमें कहा गया है कि सरकारी नौकरी वालों को तनख्वाह भी चाहिए,ऊपरी कमाई भी चाहिए और आमजनों की जान भी चाहिए।कुछ ऐसा ही कारनामा साहिबगंज के चिकित्सक आजकल करते नजर आ रहे हैं, जिसका खुलासा जिले के कोटालपोखर की एक सहिया राबिया बेगम ने किया है।
मामले में उक्त सहिया ने बताया कि कोटालपोखर निवासी इलियास नामक व्याक्ति, जो संभवतः कुष्ठ रोगी है। उसके पैर के तलवे में एक ऐसा जख्म है, जो सूखने का नाम ही नहीं ले रहा,जिस कारण वे काफी तकलीफ़ में है। ऐसा नहीं है कि उन्होंने इसका इलाज नहीं करवाया। दरअसल इनकी सबसे बड़ी बीमारी गरीबी है, जिसके कारण एक छोटा सा जख्म उन्हें मौत के और करीब ले जा रहा है और शायद सरकारी डॉक्टर भी यही चाहते हैं।
उक्त सहिया के कथन के अनुसार रोगी अपने जख्म का इलाज करवाने अपने निवास क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद गए थे।जहां उनका प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज हेतु जिला अस्पताल जाने की सलाह दी गई। साथ ही कुछ दवाइयां लिख कर दी गई। चिकित्सक द्वारा लिखी दवाई अस्पताल में उपलब्ध नही थी। रोगी ने चिकित्सक द्वारा लिखी दवा मेडिकल स्टोर से खरीद कर खाई, तत्पश्चात वे स्थानीय सहिया से मिले। सहिया ने मानवता का परिचय देते हुए अपने खर्च पर रोगी को इलाज हेतु जिला सदर अस्पताल तक लाया। पर जिला अस्पताल के डॉक्टर ए. गोस्वामी ने उक्त रोगी का समुचित इलाज न करते हुए उनके जख्म पर मात्र एक पट्टी लगाकर उनको वापस घर जाने को कह दिया। अब सवाल यह उठता है कि क्या ऐसे ही होते हैं, भगवान का दूसरा रूप माने जाने वाले चिकित्सक।





