नई दिल्ली:
समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर केंद्र सरकार और एनडीए शासित राज्यों ने अपनी प्रशासनिक एवं विधायी प्रक्रियाओं की गति काफी तेज़ कर दी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले सभी 21 बीजेपी-एनडीए शासित राज्यों में UCC लागू करने के ऐलान के बाद, अब हर राज्य में इसे धरातल पर उतारने की टाइमलाइन पर काम शुरू हो चुका है।
वर्तमान में उत्तराखंड में कानून पूरी तरह लागू हो चुका है, जबकि गुजरात और असम में राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद इसे अधिसूचित करने की प्रक्रिया जारी है। मध्य प्रदेश में बिल विधानसभा से पास होकर राष्ट्रपति भवन की मंज़ूरी का इंतज़ार कर रहा है।
इसे भी पढ़ेंः राहुल गांधी ने लॉन्च की 'सत्याग्रह' वेबसाइट, एकजुट होंगी देश भर की आवाज़ें
राज्यों का टाइमलाइन विश्लेषण: कितना लगता है समय?
विभिन्न राज्यों में कमेटी के गठन से लेकर बिल पास होने तक के समय का विश्लेषण करें तो प्रक्रिया में औसतन 3 महीने से लेकर 20 महीने तक का समय लग रहा है:
| राज्य | कमेटी का गठन | विधानसभा से बिल पास | लगा कुल समय | वर्तमान स्थिति |
| उत्तराखंड | 27 मई 2022 | 07 फरवरी 2024 | ~20 महीने | कानून लागू (जनवरी 2025 से) |
| गुजरात | 04 फरवरी 2025 | 24 मार्च 2026 | ~13 महीने | राष्ट्रपति की मंज़ूरी प्राप्त (17 सितंबर 2026) |
| असम | सीधे कैबिनेट निर्णय | 27 मई 2026 | ~1 महीना | राष्ट्रपति की मंज़ूरी प्राप्त (29 सितंबर 2026) |
| मध्य प्रदेश | 27 अप्रैल 2026 | 21 जुलाई 2026 | ~3 महीने | विधानसभा से पास, राष्ट्रपति की मंजूरी लंबित |
| राजस्थान | जून 2026 | प्रक्रियाधीन | — | कैबिनेट से मंज़ूरी (13 अगस्त 2026), बिल विधानसभा में |
इसे भी पढ़ेंः दिल्ली में AAP को झटका: मुख्य प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने थामा कांग्रेस का हाथ, केजरीवाल पर साधा निशाना
जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई: UCC ड्राफ्टिंग का मुख्य चेहरा
देश भर के UCC ड्राफ्टिंग में सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की भूमिका सबसे अहम रही है। वे उत्तराखंड, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की UCC कमेटियों की अगुवाई कर चुकी हैं। उत्तराखंड मॉडल के सफल ड्राफ्ट के बाद कई राज्यों ने इसी मॉडल और उनकी सिफारिशों को आधार बनाया है, जिससे प्रक्रिया में काफी तेज़ी आई है।
प्रक्रिया में देरी क्यों और आगे की राह क्या?
UCC केवल विवाह या तलाक तक सीमित नहीं है; इसमें विरासत, गोद लेना, गुजारा भत्ता और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे संवेदनशील और जटिल विषय शामिल हैं।
- परामर्श एवं ड्राफ्टिंग: आम जनता, कानूनी विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों से सुझाव लेना।
- कैबिनेट एवं विधानसभा: ड्राफ्ट को कैबिनेट की मंज़ूरी दिलाकर विधानसभा से पारित कराना।
- राष्ट्रपति की मंज़ूरी: राज्य सूची और समवर्ती सूची के कानूनी पेंचों के कारण इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है।
- अधिसूचना व नियम (Rules): मंज़ूरी के बाद राज्य सरकार नियमावली तैयार कर लागू करने की तिथि तय करती है।
मध्य प्रदेश (3 महीने) और गुजरात (13 महीने) के हालिया उदाहरणों से स्पष्ट है कि यदि ड्राफ्ट का मॉडल तैयार हो, तो प्रक्रिया को 3 से 6 महीने के भीतर पूरा किया जा सकता है। 2029 के टारगेट को हासिल करने के लिए महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों को आगामी ढाई वर्षों में अपनी विधायी प्रक्रियाओं को तेज़ गति देनी होगी।
#UniformCivilCode #UCC #AmitShah #NDA #IndianPolitics #LegalUpdates #JusticeRanjanaDesai #UttarakhandUCC #GujaratUCC #BreakingNews
#समान_नागरिक_संहिता #यूसीसी #अमित_शाह #एनडीए #भारतीय_कानून #उत्तराखंड_यूसीसी #गुजरात_यूसीसी #डिजिटल_अपडेट





