मेरठ:

देश को झकझोर देने वाले चर्चित मेरठ के सौरभ हत्याकांड में जिला अदालत ने बहुप्रतीक्षित और ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। जिला जज अरविंद कुमार मिश्र की अदालत ने इस सनसनीखेज मामले में दोनों दोषियों—मुस्कान और साहिल—को मौत की सजा (मृत्युदंड) सुनाई है। अदालत के इस फैसले के बाद कोर्ट रूम और बाहर मौजूद लोगों ने इसे न्याय की एक बड़ी जीत बताया है।

कोर्ट की कार्यवाही और दोषियों का रिएक्शन

मंगलवार, 14 अक्टूबर को निर्धारित फैसले के दिन सुबह से ही जिला अदालत परिसर में भारी हलचल थी। सुबह साढ़े 10 बजे जिला कारागार से मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया:

  • मुस्कान की गुहार: सुनवाई के दौरान मुस्कान अपनी बेटी को गोद में लिए हुए थी। उसने अपनी दो छोटी बच्चियों का हवाला देते हुए अदालत से रहम की गुहार लगाई।
  • साहिल की चुप्पी: जब जज ने साहिल से सफाई में कुछ कहने को कहा, तो वह पूरी तरह गुमसुम खड़ा रहा।
  • अंत में दोनों ने अदालत के समक्ष यह भी कहा कि उन्हें न्यायपालिका के फैसले पर पूरा भरोसा है।

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दोनों पक्षों के बीच सवा घंटे चली तीखी बहस

सुबह सवा ग्यारह बजे से शासकीय अधिवक्ता केके चौबे और बचाव पक्ष की अधिवक्ता रेखा जैन के बीच लगभग सवा घंटे तक जोरदार बहस चली।

  • बचाव पक्ष ने नरमी बरतने की दलील दी, वहीं सरकारी वकील केके चौबे ने दोनों को फांसी के फंदे तक पहुँचाने के लिए पुख्ता साक्ष्य और नजीरें पेश कीं।
  • दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जज ने शाम 4:00 बजे फैसले की घड़ी मुकर्रर की।

अदालत का अंतिम फैसला और सजा के बिंदु

शाम 4:05 बजे जिला जज अरविंद कुमार मिश्र ने ऑनलाइन जुड़े दोषियों को सजा सुनाई:

  1. हत्या के जुर्म में (BNS धारा 103(1) व 3(5)): दोनों को दोषी करार देते हुए मृत्युदंड (फांसी की सजा) और प्रत्येक पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना न भरने पर पांच महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। (यह मृत्युदंड माननीय उच्च न्यायालय की पुष्टि के अधीन रहेगा)।
  2. साक्ष्य मिटाने के जुर्म में (धारा 238(ए)): दोनों को सात-सात साल का कठोर कारावास और 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी दिया गया है।

कोर्ट रूम में गूंजे 'भारत माता की जय' के नारे

जैसे ही सवा चार बजे अदालत ने सजा का यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया, खचाखच भरे कोर्ट रूम का माहौल बदल गया। वकीलों और मौजूद लोगों ने 'भारत माता की जय' के नारे लगाए और तालियों से फैसले का स्वागत किया। वकीलों ने इसे समाज के लिए एक बड़ा संदेश और एक मिसाल करार दिया है।

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