आइची-नागोया: एशियन गेम्स 2026 में शानदार सफलता के बाद अब जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन पैरा गेम्स में भी भारतीय पैरा एथलीटों का जलवा चारों तरफ फैल रहा है। भारत के जांबाज खिलाड़ी एक के बाद एक देश की झोली में पदक डाल रहे हैं। इस गौरवशाली अभियान में उत्तर प्रदेश के मेरठ से ताल्लुक रखने वाले युवा पैरा एथलीट आयुष वर्मा ने अपनी अद्भुत प्रतिभा का परिचय देते हुए मात्र दो दिनों के भीतर दो बड़े पदक अपने नाम कर लिए हैं। आयुष ने मेंस F53 कैटेगरी में शॉट पुट का स्वर्ण पदक (गोल्ड मेडल) जीतकर देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। यह इस टूर्नामेंट में भारत का 10वां गोल्ड मेडल है।
जैवलिन थ्रो के बाद शॉट पुट में स्वर्ण पर कब्जा
आइची-नागोया में चल रहे पैरा एशियन गेम्स के चौथे दिन (बुधवार, 21 अक्टूबर) मेंस F53 कैटेगरी में शॉट पुट का रोमांचक मुकाबला हुआ, जिसमें आयुष वर्मा ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। उत्तर प्रदेश के मेरठ निवासी आयुष के लिए यह पिछले दो दिनों में दूसरा बड़ा इवेंट था।
इससे ठीक एक दिन पहले (मंगलवार को) उन्होंने इसी F53 कैटेगरी में जैवलिन थ्रो का कांस्य पदक (ब्रॉन्ज मेडल) अपने नाम किया था। लेकिन आयुष इतने से संतुष्ट नहीं होने वाले थे; उन्होंने शॉट पुट में अपने अचूक निशाने और ताकत के दम पर गोल्ड मेडल जीतकर ही दम लिया। शॉट पुट के इस कड़े मुकाबले में आयुष ने 8.16 मीटर का अपना बेस्ट थ्रो फेंका, जो उन्हें स्वर्ण पदक दिलाने के लिए पर्याप्त था। उन्होंने ईरान के दिग्गज एथलीट अलीरेजा हमामी को पछाड़ा, जिन्होंने 8.09 मीटर के थ्रो के साथ रजत पदक (सिल्वर) हासिल किया।
F53 कैटेगरी में जैवलिन थ्रो, शॉट पुट और डिस्कस थ्रो जैसे खेलों में महारत रखने वाले आयुष ने साबित कर दिया है कि वे एक साथ कई स्पर्धाओं में विश्व स्तरीय प्रदर्शन करने का माद्दा रखते हैं।
दुर्घटना को मात देकर लिखी सफलता की इबारत
आयुष वर्मा का यह सफर जितना शानदार है, उतनी ही प्रेरणादायक उनकी संघर्ष भरी कहानी है।
- कुछ साल पहले एक सड़क दुर्घटना में आयुष की रीढ़ की हड्डी (Spine) में गंभीर चोट आ गई थी।
- इस भीषण हादसे के कारण उनका चलना-फिरना पूरी तरह बंद हो गया और वे व्हीलचेयर तक सिमट कर रह गए।
- लेकिन आयुष ने इस शारीरिक चुनौती को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने हार मानने के बजाय मैदान पर वापसी करने की ठानी।
- लगभग 6 साल तक लगातार और कड़ी मेहनत के बाद, आज उन्होंने एशियन पैरा गेम्स में दोहरी सफलता हासिल करके यह साबित कर दिया कि हौसले बुलंद हों तो हर मुश्किल आसान हो जाती है।
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शीतल-पायल और अनुभव चौधरी ने भी चमकाया देश का नाम
आयुष की इस सफलता के अलावा भारत के अन्य एथलीटों ने भी पदक जीतकर देश की झोली भरी:
- शीतल देवी और पायल नाग का सिल्वर: भारत की स्टार पैरा-आर्चर शीतल देवी और एशियन गेम्स में डेब्यू कर रही पायल नाग की जोड़ी ने महिलाओं की कंपाउंड डबल्स आर्चरी में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक (सिल्वर) अपने नाम किया। हालांकि खिताबी मुकाबले में इस भारतीय जोड़ी को चीनी जोड़ी के खिलाफ बेहद करीबी संघर्ष में हार का सामना करना पड़ा।
- अनुभव चौधरी का ब्रॉन्ज: भारत के प्रतिभावान एथलीट अनुभव चौधरी ने मेंस 100 मीटर T35 कैटेगरी में बेहतरीन दौड़ लगाते हुए कांस्य पदक (ब्रॉन्ज मेडल) देश की झोली में डाला।
भारतीय पैरा एथलीटों का यह प्रदर्शन देश के हर नागरिक के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है।
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