अदन/सना: युद्धग्रस्त यमन में हिंसा का दायरा एक बार फिर खतरनाक रूप से बढ़ गया है। गुरुवार को हूती विद्रोहियों ने यमन के अस्थायी प्रशासनिक केंद्र अदन में स्थित ऐतिहासिक अल-मआशिक राष्ट्रपति महल पर भीषण हमला कर दिया। इस कायराना हमले में कम से कम दो सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई, जबकि छह अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
कैबिनेट मंत्री सुरक्षित, सरकार नहीं छोड़ेगी शहर
अल अरबिया की रिपोर्ट के अनुसार, यमन के युवा मंत्री नायेफ सालेह अल-बकरी ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की है कि इस बड़े हमले के बावजूद अदन में मौजूद कैबिनेट के सभी मंत्री पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि इन हमलों से सरकार के हौसले पस्त नहीं होने वाले हैं और मंत्री शहर छोड़कर नहीं जाएंगे।
सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों और हवाई अड्डों पर भी हमले का दावा
यह हमला ऐसे वक्त में हुआ है जब हूती आंदोलन और सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच सैन्य टकराव चरम पर पहुंच गया है। इससे एक दिन पहले, हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने दावा किया था कि उनके संगठन ने बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल करते हुए सऊदी अरब के कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया है।
- निशाने पर ऊर्जा ठिकाने: हूतियों के अनुसार, पूर्वी प्रांत में स्थित दुनिया की दिग्गज तेल कंपनी 'सऊदी अरामको' के प्रतिष्ठानों, रास तनुरा रिफाइनरी और रियाद स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमले किए गए, जिससे वहां आग लगने और भारी तबाही का दावा किया गया है।
- सऊदी गठबंधन की जवाबी कार्रवाई: दूसरी ओर, सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने दक्षिण-पश्चिमी सऊदी अरब के खमिस मुशैत की ओर दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने का दावा किया है। साथ ही रियाद के उत्तर में तीन ड्रोन को भी मार गिराया गया है।
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लाल सागर और वैश्विक व्यापार पर मंडराया संकट
यमन और सऊदी अरब के बीच लगातार बढ़ते इस संघर्ष ने क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ लाल सागर (Red Sea) और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएं बढ़ा दी हैं। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जाता है।
गौरतलब है कि यमन में यह संघर्ष वर्ष 2014 से चल रहा है, जब हूतियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया था, जिसके बाद 2015 में सऊदी गठबंधन ने सैन्य हस्तक्षेप किया था।
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