नवल किशोर सिंह,रांची। लोकसभा चुनाव 2024 में रांची संसदीय सीट से इंडिया गठबंधन की प्रत्याशी यशस्विनी सहाय ने अपनी बहुमुखी प्रतिभा प्रदर्शित कर अद्भुत नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया है।





चुनावी महासमर के मैदान को अपने पसीने से सींच कर सुश्री सहाय ने राजनीतिक गलियारों में एक लंबी लकीर खींच डाली है। लोकसभा चुनाव में जीत का संकल्प लिए रांची संसदीय क्षेत्र के सर्वांगीण विकास का सपना साकार करने के लिए उन्होंने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।





पहली बार राजनीति के क्षेत्र में उतरी सुश्री सहाय ने जनता के बीच एक परिपक्व प्रत्याशी के रूप में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। चुनाव प्रचार व जनसंपर्क अभियान के दौरान उन्होंने दर्जनाधिक रोड शो,रैलियां व जनसभाएं की और अपने ओजस्वी वक्तव्यों से जनता का मन मोहने में सफल रही।





परिश्रम की पराकाष्ठा प्रदर्शित कर उन्होंने क्षेत्र में खूब पसीना बहाया।तन झुलसाने व मन अकुलाने वाली प्रचंड गर्मी में भी 27 वर्षीय सुश्री सहाय की ऊर्जा में लेशमात्र भी कमी नहीं आई।मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर आकर दर्जनाधिक साक्षात्कार के माध्यम से अपने विजन, उद्देश्यों और राजनीतिक भविष्य का रोड मैप साझा किया।





लोकसभा चुनाव को लेकर तकरीबन एक महीने तक क्षेत्र का सघन दौरा किया। जनसंपर्क अभियान व जनसभाओं में मतदाताओं से विनम्र आग्रह कर समर्थन मांगा।पेशे से अधिवक्ता सुश्री सहाय चुनावी जनसभाओं में अपने वक्तव्यों से जनता को आकर्षित करने में भी सफल रही।अपने पिता पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय व मां (प्रख्यात टीवी कलाकार) रेखा सहाय के कुशल मार्गदर्शन में यशस्विनी ने दर्जनों जनसभाएं की। मतदाताओं के बीच अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की।





सुश्री सहाय का मानना है कि इस बार चुनाव में इंडिया गठबंधन अच्छी संख्या में सीटें जीतने वाली है। उनके मुताबिक आईएनडीआईए को स्पष्ट जनादेश मिलने वाला है। यशस्विनी कहती हैं कि भाजपा का चुनावी एजेंडा धर्म-मजहब की बात पर लोगों के बीच सांप्रदायिक विभाजन पैदा करने का रहा है। जनता भाजपा के मंसूबे को जान गई है। भाजपा से जनता का मोह भंग हो गया है। इसका परिणाम मतगणना के दिन (4 जून को) देखने को मिलेगा।बहरहाल,जनमत के आधार पर यशस्विनी सहाय के राजनीतिक भविष्य का फैसला चार जून को होगा। किसके सिर जीत का सेहरा बंधेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।