गुरुग्राम। अडनी रियल्टी के 31 वर्षीय प्रोजेक्ट मैनेजर युवराज सिंह मनचंदा की नृशंस हत्या की गुत्थी जैसे-जैसे सुलझ रही है, वैसे-वैसे आरोपियों की खौफनाक और शातिर आपराधिक पृष्ठभूमि से पर्दा उठ रहा है। मामले की मुख्य आरोपी अन्या वत्स और उसके साथी संयम सचदेवा पर न केवल हत्या का संदेह गहराता जा रहा है, बल्कि करोड़ों रुपये की ठगी और ब्लैकमेलिंग के बड़े रैकेट का भी पर्दाफाश हुआ है। पुलिस अब इस मुख्य बिंदु पर ध्यान केंद्रित कर रही है कि कहीं युवराज को आरोपियों के इस ठगी साम्राज्य का पता तो नहीं चल गया था।

क्लाइंट मीटिंग का झांसा और रहस्यमयी मौत

6 सितंबर को हुई इस वारदात के दिन अन्या वत्स और संयम सचदेवा ने युवराज को एक क्लाइंट मीटिंग के बहाने बुलाया था। युवराज के परिवार के एक करीबी ने बताया कि निकलने से पहले युवराज ने अपनी मंगेतर को फोन कर कहा था कि वह अन्या के साथ क्लाइंट से मिलने जा रहा है और 20 मिनट में वापस कॉल करेगा। इसके बाद युवराज रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हो गया।

10 सितंबर को गुरुग्राम से युवराज का शव बरामद हुआ। हत्या के बाद आरोपी उत्तराखंड की ओर भाग निकले थे और रास्ते में वृंदावन में रुके थे। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि वृंदावन में रुकने का उनका असली मकसद क्या था। इसके अतिरिक्त, पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक अवैध पिस्टल और युवराज की कार बरामद कर फोरेंसिक (FSL) जांच के लिए भेज दी है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच कर यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या आरोपियों ने इंटरनेट पर शव को ठिकाने लगाने के तरीके (Search History) तलाशे थे।

फर्जी ED नोटिस से 1.2 करोड़ की ठगी और 'पत्नी को बेचो' की धमकियां

जांच अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों पर फर्जी प्रवर्तन निदेशालय (ED) नोटिस और केंद्रीय गृह मंत्रालय के नाम पर करोड़ों ऐंठने का संगीन मामला दर्ज है। इसी साल अगस्त में दिल्ली के संसद मार्ग थाने में दर्ज एक FIR के मुताबिक:

  • फर्जी नोटिस का डर: संयम और अन्या ने संयम के एक पुराने सहपाठी को WhatsApp पर ED, NDPS, PMLA और UAPA जैसी सख्त धाराओं के फर्जी नोटिस भेजकर डराया और मामले को निपटाने का दावा किया।
  • 1.2 करोड़ ऐंठे, फिर 26 करोड़ की मांग: पीड़ित ने अपनी बचत और कर्ज लेकर 1.2 करोड़ रुपये अन्या वत्स के बैंक खाते में ट्रांसफर किए। इसके बाद आरोपियों ने सरकारी एजेंसियों को रिश्वत देने का झूठा दावा कर 26 करोड़ रुपये और मांगे।
  • अमानवीय चैट: FIR में शामिल WhatsApp चैट के अनुसार रकम वसूलने के लिए खौफनाक दबाव बनाया गया, जिसमें लिखा था— "Sell your wife/do anything, just repay this." (अपनी पत्नी को बेचो या कुछ भी करो, लेकिन पैसे चुकाओ)।

इसके अलावा, संयम सचदेवा पर अपनी अलग रह रही पत्नी से लगभग 4.5 करोड़ रुपये की जायदाद ठगने का भी आरोप है, जिसमें घरेलू हिंसा का मामला दर्ज है।

पुलिस और जांच प्रक्रियाओं पर परिवार के सवाल

मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर युवराज के परिवार ने गंभीर सवाल उठाए हैं:

  • ZIPNET डेटा की गड़बड़ी: परिवार का आरोप है कि 10 सितंबर को शव मिलने के बावजूद 16 सितंबर तक गुरुग्राम पुलिस ने ZIPNET (जोनल इंटीग्रेटेड पुलिस नेटवर्क) पर जानकारी को 'Unidentified dead bodies' के बजाय 'Unidentified persons found' श्रेणी में डाल रखा था।
  • पुलिस का स्पष्टीकरण: गुरुग्राम पुलिस ने देरी के आरोपों को खारिज किया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दिल्ली पुलिस को परिवार से सूचना मिलते ही 24 घंटे के भीतर गुमशुदगी की FIR दर्ज कर गुरुग्राम पुलिस से तुरंत संपर्क करना चाहिए था।

बयानों में अंतर और आगे की जांच

पूछताछ में आरोपियों के बयान लगातार बदल रहे हैं। अन्या वत्स ने पुलिस के सामने दावा किया कि युवराज उसे धमकियां दे रहा था, लेकिन जांच अधिकारी का स्पष्ट कहना है कि अब तक इस बात का कोई सबूत नहीं मिला है।

पुलिस अब इस थ्योरी पर काम कर रही है कि क्या युवराज को आरोपियों के इन फर्जी ED नोटिसों और करोड़ों की ठगी का राज़ पता चल गया था, जिसके चलते उसे रास्ते से हटाने के लिए यह खौफनाक साजिश रची गई।