लखनऊ:

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के ग्रामीण इलाकों में शिक्षा और ई-लर्निंग के क्षेत्र में आए बड़े बदलाव को साझा किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर जानकारी देते हुए सीएम योगी ने कहा कि राज्य की 57,600 से अधिक ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी की शुरुआत से अब ग्रामीण युवाओं के सपनों की राह आसान हो गई है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अब गांव के बच्चों को शहरों की ओर रुख करने या समय और पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं है।

बहराइच का खसहा मोहम्मदपुर बना बदलाव की नजीर

मुख्यमंत्री ने बहराइच जिले के तेजवापुर ब्लॉक स्थित 'खसहा मोहम्मदपुर' ग्राम पंचायत का उदाहरण देते हुए बताया कि ग्राम पंचायत सचिवालय में बनी डिजिटल लाइब्रेरी परंपरागत अध्ययन और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम है।

  • उपलब्ध सुविधाएं: इस डिजिटल लाइब्रेरी में कंप्यूटर, प्रिंटर, हाई-स्पीड इंटरनेट, वाई-फाई, स्मार्ट टीवी और सीसीटीवी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
  • अध्ययन सामग्री: यहां प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकों के साथ-साथ 'नेशनल बुक ट्रस्ट' (NBT) का समृद्ध साहित्य और डिजिटल कंटेंट दोनों एक ही छत के नीचे सुलभ हैं।
  • समय व धन की बचत: जो समय और पैसा पहले छात्रों का शहरों की ओर आने-जाने में खर्च होता था, अब उसका उपयोग युवा अपनी पढ़ाई को धार देने में कर रहे हैं।

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2017 के मुकाबले शिक्षा ढांचे में बड़ा उछाल

2017 से पहले की स्थिति की तुलना करते हुए मुख्यमंत्री ने आंकड़ों के साथ राज्य के शैक्षिक कायाकल्प को रेखांकित किया:

प्रमुख मापदंड2017 से पहलेवर्तमान स्थिति
डिजिटल / ई-लाइब्रेरीजिला/राज्य स्तर के केवल 76 स्थान57,600 ग्राम पंचायतों तक विस्तार
स्मार्ट क्लासरूमनगण्य/सीमित32,000+ विद्यालयों में क्रियाशील
आईसीटी लैब (ICT Labs)सीमित पहुँच15,000+ स्कूलों में तकनीक से जुड़ाव
युवाओं को डिजिटल उपकरण-~60 लाख युवाओं को स्मार्टफोन/टैबलेट वितरित

पूर्ववर्ती सरकारों पर साधा निशाना

पूर्ववर्ती अखिलेश यादव सरकार (2012-16) के कार्यकाल पर निशाना साधते हुए सीएम योगी ने लिखा कि उस दौरान पर्याप्त सरकारी फंड होने के बावजूद 6.22 लाख बच्चों को पाठ्यपुस्तकें और करीब 97 लाख बच्चों को यूनिफॉर्म तक नहीं मिल सकी थी।

उन्होंने कहा कि अब उत्तर प्रदेश ने संसाधनों की उपलब्धता से लेकर उनकी अंतिम छोर तक पहुंच सुनिश्चित करने में लंबी दूरी तय की है। ग्राम पंचायत सचिवालय प्रशासनिक सेवाओं के साथ-साथ अब 'ज्ञान और तकनीक के केंद्र' बनकर उभर रहे हैं, जिससे अभिभावकों का सरकार और व्यवस्था पर भरोसा मजबूत हुआ है।

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