देश में रबी सीजन 2026-27 की तैयारियां पूरे जोर-शोर से शुरू हो चुकी हैं। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, केंद्र सरकार ने इस सीजन के लिए कुल 17.77 करोड़ टन (177.72 मिलियन टन) खाद्यान्न उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। हालांकि, बुवाई से ठीक पहले सितंबर महीने में सामान्य से काफी कम हुई बारिश ने किसानों और कृषि वैज्ञानिकों दोनों की माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।

रबी फसलों के लिए तय किए गए उत्पादन लक्ष्य

खाद्य सुरक्षा और महंगाई पर नियंत्रण पाने के उद्देश्य से सरकार ने प्रमुख फसलों के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय किए हैं:

फसल श्रेणीप्रमुख फसलतय उत्पादन लक्ष्य
मुख्य खाद्यान्नगेहूं (Wheat)12.10 करोड़ टन (121 मिलियन टन)
दलहन (Pulses)चना एवं मसूर सहित1.72 करोड़ टन (चना: 1.23 करोड़, मसूर: 21 लाख टन)
तिलहन (Oilseeds)सरसों (Mustard)1.43 करोड़ टन (14.3 मिलियन टन)
पोषक/मोटा अनाजजौ और ज्वार2.23 करोड़ टन (जौ: 24.2 लाख, ज्वार: 31.9 लाख टन)
अन्य प्रमुख फसलेंरबी चावल एवं मक्काचावल: 1.672 करोड़ टन | मक्का: 1.669 करोड़ टन

दलहन और तिलहन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि आयात पर देश की निर्भरता को कम किया जा सके और भारत को इन क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनाया जा सके।

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मौसम का मिजाज: कमजोर बारिश और अल-नीनो की चुनौती

उत्पादन लक्ष्यों की घोषणा के बीच इस बार मौसम सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। रिपोर्टों के अनुसार:

  • सितंबर की बारिश में गिरावट: इस महीने देश भर में औसतन 21% कम बारिश दर्ज की गई है।
  • अन्नदाताओं पर मार: देश के 'अन्न भंडार' कहे जाने वाले राज्यों—पंजाब में 56% और हरियाणा में 42% तक बारिश की कमी दर्ज की गई है।
  • अल-नीनो का खतरा: अल-नीनो के मजबूत होने की आशंका से खेतों में नमी की कमी और तापमान में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे अक्टूबर-नवंबर में होने वाली बुवाई प्रभावित होने का खतरा है।

बाजार और कृषि कारोबार पर क्या होगा असर?

बुवाई का सीजन शुरू होते ही डीएपी (DAP), यूरिया और उन्नत किस्म के बीजों की मांग में भारी तेजी आने की उम्मीद है। वहीं, बारिश की कमी को देखते हुए सिंचाई उपकरणों, जैसे कि ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम (टपकन और छिड़काव सिंचाई) तथा जल-संरक्षण तकनीकों से जुड़े कृषि-कारोबार में इस बार नया उछाल देखने को मिल सकता है।

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किसानों के लिए सलाह

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सुझाव दिया है कि वे सिंचाई के वैकल्पिक संसाधनों की व्यवस्था पहले से रखें। बुवाई का सही समय और तकनीक तय करने के लिए किसान अपने स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और मौसम विभाग की चेतावनियों के अनुसार ही कदम उठाएं।

यद्यपि सरकार का लक्ष्य काफी मजबूत है, लेकिन इसका हासिल होना पूरी तरह से आने वाले हफ्तों में मौसम के रुख और समय पर सिंचाई प्रबंधन पर निर्भर करेगा।