रांची: झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली व अनियमतताओं को लेकर छात्रों का जनाक्रोश चरम पर पहुंच गया है। आंदोलन के 18वें दिन सोमवार को 'विधानसभा घेराव' के दौरान राजधानी की सड़कों पर अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला। भारी सुरक्षा बलों की तैनाती और पुलिस द्वारा लगाई गई तीन-परत की मजबूत बैरिकेडिंग को तोड़ते हुए हजारों की संख्या में छात्र विधानसभा परिसर की ओर बढ़ गए।

इस बीच, समर्थन देने पहुंचे विपक्ष के नेताओं पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू समेत कई विधायकों व नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लेकर खेलगांव भेज दिया है।

कंटीली तारें भी न रोक सकीं छात्रों का जोश

जगरनाथपुर सेक्टर-2 और शहीद मैदान क्षेत्र में प्रशासन द्वारा बॉर्डर जैसी कंटीली तारों वाली बैरिकेडिंग की गई थी। इसके बावजूद छात्र पुलिस को झांसा देकर जगन्नाथपुर मंदिर के शॉर्टकट रास्तों से आगे बढ़ते दिखे।

भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो गंभीर स्थिति के बावजूद एंबुलेंस से विधानसभा घेराव स्थल पहुंचे, जहां समर्थकों ने उन्हें कंधे पर उठाकर शहीद मैदान तक पहुंचाया। हालांकि, एडीजी मनोज कौशिक और एसएसपी रांची राकेश रंजन के नेतृत्व में भारी पुलिस बल और आला अधिकारी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मुस्तैद हैं।

विपक्ष का बहिष्कार, धारा 163 लागू

विधानसभा का सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन विपक्ष के नेताओं की हिरासत और विरोध प्रदर्शन के कारण सदन में विपक्ष अनुपस्थित रहा। प्रशासन ने किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए विधानसभा क्षेत्र के आसपास धारा 163 लागू कर दी है।

क्यों बेनतीजा रही सरकार से वार्ता?

सोमवार के इस प्रचंड प्रदर्शन से पहले, रविवार को झारखंड सरकार के मंत्रियों की तीन सदस्यीय समिति और छात्र प्रतिनिधियों के बीच छह घंटे तक चली तीसरे दौर की वार्ता भी बेनतीजा रही।

  • CBI जांच और CGL परीक्षा रद्द करने पर पेच: सरकार का कहना है कि JSSC CGL परीक्षा हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत हुई है, इसलिए सरकार इसे सीधे रद्द नहीं कर सकती। छात्र CGL परीक्षा रद्द करने और पूरी प्रक्रिया की CBI जांच पर अड़े हैं, जिस पर सहमति नहीं बन सकी।
  • 98 प्रतिशत मांगों पर सहमति का दावा: मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि सरकार ने छात्रों की 98% मांगों को स्वीकार कर लिया है, लेकिन छात्र नेताओं का स्पष्ट कहना है कि जब तक प्रमुख मांगें लिखित रूप में पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।

इन मुख्य बिंदुओं पर बनी थी सरकारी सहमति:

  1. रद्द होंगी JPSC की परीक्षाएं: 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा, बैकलाग परीक्षा-2023 और 2025 को रद्द करने पर सरकार सहमत।
  2. न्यायिक आयोग और ED जांच: CGL परीक्षा की जांच के लिए सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग का गठन और वित्तीय अनियमितताओं की जांच ED से कराने का अनुरोध।
  3. फास्ट ट्रैक कोर्ट: CID जांच में 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल कर फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए मामलों का त्वरित निपटारा।
  4. सिस्टम रिफॉर्म: IIT-ISM और XLRI के विशेषज्ञों की कमेटी बनाकर परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार का खाका तैयार करना।

छात्र संगठनों ने सरकार के मौखिक आश्वासनों को खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मुख्य मांगें पूरी नहीं होंगी, शांतिपूर्ण तरीके से सड़क से सदन तक संघर्ष जारी रहेगा।