रांची: झारखंड की राजधानी रांची में विभिन्न छात्र संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और राजनीतिक दलों द्वारा लगातार आयोजित किए जा रहे धरना-प्रदर्शन, घेराव और रैलियों को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब रांची और बुंडू में किसी भी प्रकार का सार्वजनिक कार्यक्रम, जुलूस या आमसभा आयोजित करने से पहले सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति लेना और विस्तृत रूट प्लान की जानकारी देना अनिवार्य कर दिया गया है।

रांची के उपायुक्त (DC) मंजूनाथ भंजत्री ने स्पष्ट किया कि बिना पूर्व सूचना और अनुमति के आयोजित होने वाले कार्यक्रमों से शहर की विधि-व्यवस्था, जन-सुरक्षा और दैनिक यातायात व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ता है, जिससे आम नागरिकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

आयोजकों के लिए जारी मुख्य दिशा-निर्देश

  • अनुमति अनिवार्य: रांची सदर और बुंडू के अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) के कार्यालय से निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्यक्रम की लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
  • विस्तृत रूट प्लान: जुलूस या रैली का प्रस्तावित मार्ग (रूट), आयोजन की तिथि, शुरुआत व समापन का समय और शामिल होने वाले प्रतिभागियों की संभावित संख्या की जानकारी प्रशासन को देनी होगी।
  • प्रमुख व्यक्तियों की सूची: सुरक्षा प्रबंधों को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए कार्यक्रम में शामिल होने वाले वीआईपी और प्रमुख व्यक्तियों की जानकारी भी उपलब्ध करानी होगी।
  • तय मार्ग का पालन: जुलूस या विरोध प्रदर्शन केवल प्रशासन द्वारा स्वीकृत मार्ग और स्थल पर ही आयोजित किए जा सकेंगे। सार्वजनिक रास्तों को अनधिकृत रूप से बाधित करने पर कानूनी कार्रवाई होगी।

नागरिकों और छात्रों से अपील

जिला प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था और जन-सुरक्षा के नियमों के अधीन है।

प्रशासन ने छात्रों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी आंदोलन या रैली में शामिल होने से पहले आयोजकों से उसकी वैधानिक स्थिति और प्रशासनिक अनुमति की जांच कर लें। साथ ही, सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की अफवाह या भ्रामक सूचनाओं के बहकावे में न आने की हिदायत दी गई है।