नई दिल्ली / अयोध्या: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में भक्तों द्वारा अर्पित किए जाने वाले दान और चढ़ावे की कथित चोरी व वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े हाई-प्रोफाइल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम आदेश पारित किया है। उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा मामले में चार्जशीट (Charge Sheet) दाखिल किए जाने की जानकारी मिलने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई (CBI) जांच और स्वतंत्र जांच की मांग वाली सभी याचिकाओं का निपटारा कर दिया है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सुनवाई के बाद स्पष्ट किया कि अब संबंधित मजिस्ट्रेट अदालत कानून के मुताबिक आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी। हालांकि, जनहित और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने याचिकाकर्ताओं को यह छूट दी है कि वे मजिस्ट्रेट के समक्ष चलने वाली आपराधिक कार्यवाही में सहायता कर सकते हैं।

चार्जशीट दाखिल होने के बाद बदला कानूनी रुख

सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से शीर्ष अदालत को अवगत कराया गया कि मामले की विस्तृत जांच पूरी की जा चुकी है और सक्षम अदालत में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की निगरानी जारी रखने के बजाय याचिकाओं को निस्तारित कर दिया। पीठ ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि यह मामला केवल आरोपी और राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें व्यापक जनहित का पहलू भी शामिल है। यही कारण है कि अदालत ने याचिकाकर्ताओं को ठीक उसी प्रकार मजिस्ट्रेट की सहायता करने की अनुमति दी है, जैसा कि कानून किसी अपराध के पीड़ित को अदालत की मदद करने का अधिकार प्रदान करता है।

साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने इस मामले में लगाए गए आरोपों की सत्यता या उनके गुण-दोष (Merits) पर अपनी ओर से कोई टिप्पणी या राय व्यक्त नहीं की है। अब मजिस्ट्रेट अदालत चार्जशीट और पुलिस द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष रूप से आगे की कार्रवाई तय करेगी।

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क्या है पूरा मामला और क्या थे आरोप?

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान पेटी और चढ़ावे की रकम में कथित चोरी व वित्तीय गड़बड़ियों का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया था। इस अनियमितता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई जनहित याचिकाएं और याचिकाएं दाखिल की गईं, जिसमें मांग की गई थी कि:

  • पूरे मामले की निष्पक्ष जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराई जाए।
  • एक स्वतंत्र जांच एजेंसी का गठन किया जाए।
  • मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन और प्रबंधन की गहन वित्तीय जांच हो।

CCTV फुटेज और SIT जांच: सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य भी रखा गया था कि जांच के दौरान CCTV फुटेज के आधार पर दान की नकदी को कथित तौर पर बिना अनुमति के निकालने की 105 घटनाएं प्रकाश में आई थीं। इस मामले की जांच में कुल आठ आरोपियों की संलिप्तता और भूमिका सामने आने की बात कही गई थी। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार की एसआईटी (SIT) से प्रोग्रेस रिपोर्ट तलब की थी और जांच की निगरानी की थी। अब पुलिस द्वारा चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद अदालत ने इस चरण पर याचिकाओं का निपटारा कर दिया है।

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