नई दिल्ली:

देश में प्राकृतिक खेती को जन-आंदोलन का रूप देने और इसका दायरा बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 'राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन' के क्रियान्वयन को तेज करने का निर्देश दिया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मिशन की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि प्राकृतिक खेती केवल एक वैकल्पिक पद्धति नहीं है, बल्कि यह किसानों की उत्पादन लागत कम करने, उनकी आय बढ़ाने और मिट्टी के स्वास्थ्य को सुधारने का सशक्त जरिया है।

प्राकृतिक खेती: अब तक की प्रगति और आगामी लक्ष्य

  • वर्तमान स्थिति: देश भर में अब तक 24 लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती को अपना चुके हैं।
  • 2030 का लक्ष्य: राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन के तहत 85 लाख किसानों को इस मुहीम से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
  • मुख्य उद्देश्य: कृषि आगत (इन्पुट) लागत को न्यूनतम करना, किसानों को आत्मनिर्भर बनाना और दीर्घकालिक टिकाऊ कृषि (Sustainable Agriculture) को बढ़ावा देना।

वैज्ञानिक अध्ययन और वास्तविक आंकड़ों पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि प्राकृतिक खेती के फायदों को केवल दावों तक सीमित न रखकर ठोस वैज्ञानिक और जमीनी आंकड़ों पर आधारित किया जाए।

  • तुलनात्मक विश्लेषण: प्राकृतिक खेती और पारंपरिक (रासायनिक) खेती करने वाले किसानों की लागत, उत्पादकता, बाजार मूल्य और शुद्ध आय का वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाएगा।
  • मृदा एवं पर्यावरण प्रभाव: प्राकृतिक खेती अपनाने के बाद मिट्टी की सेहत (Soil Health) में आए सुधार और पर्यावरणीय लाभों का सटीक मूल्यांकन अनुसंधान संस्थानों के जरिए किया जाएगा।
  • पारदर्शी नीति निर्माण: किसानों के प्रत्यक्ष अनुभवों और शोध निष्कर्षों को मिलाकर भावी नीतियों को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।

सुदृढ़ इंफ्रास्ट्रक्चर और बाजार पहुंच पर फोकस

बैठक में प्राकृतिक खेती को व्यावहारिक और लाभदायक बनाने के लिए निम्नलिखित प्राथमिकताओं पर सहमति बनी:

  1. प्रमाणन (Certification): प्राकृतिक उत्पादों की विश्वसनीयता और पहचान के लिए सुलभ प्रमाणन व्यवस्था विकसित करना।
  2. बाजार और FPOs की भूमिका: किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को मजबूत कर प्राकृतिक उपज के लिए बेहतर बाजार और उचित मूल्य उपलब्ध कराना।
  3. प्रशिक्षण और अनुसंधान: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और अन्य संस्थानों के माध्यम से किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक प्रशिक्षण देना।